Uttar Pradesh : यमुना नदी का जलस्तर खतरनाक रूप से बढ़कर जिले में भारी तबाही मचा रहा है। शनिवार सुबह 8 बजे यमुना का जलस्तर 102.68 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 100 मीटर से ढाई मीटर ऊपर है। महज एक रात में जलस्तर डेढ़ मीटर तक बढ़ गया, जिससे दो दर्जन से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।
मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष ने की सत्र संचालन पर चर्चा
बाढ़ के कारण सैकड़ों कच्चे मकान ध्वस्त हो गए और कई गांव पूरी तरह से टापू में तब्दील हो गए हैं। चिल्ला-तारा के बीच नेशनल हाईवे और ललौली रोड पर पानी भर जाने से यातायात ठप हो गया है। पुलिस ने लोगों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी है।
पैलानी क्षेत्र के शंकर पुरवा गांव में पंचायत भवन तक पानी भर चुका है। यहां 10 से 12 फीट तक पानी जमा है, जिससे लोग नाव से आने-जाने को मजबूर हैं। गर्भवती महिलाओं और बीमारों को मोटरबोट से सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है।
जसपुरा क्षेत्र के गांवों – तरौड़ा, नांदादेव, अमारा, पड़ोहरा, फकिरा डेरा, बंजारी डेरा जैसे कई गांव टापू बन गए हैं। ट्रांसफार्मर फुंकने से बिजली आपूर्ति ठप हो गई है और पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं तथा स्कूल भी प्रभावित हुए हैं। बघैला गांव में तो पानी चार फीट तक पहुंच चुका है, जिससे प्राथमिक विद्यालय डूब गया और ग्रामीणों को जूनियर स्कूल में शरण लेनी पड़ी।
किसानों की माने तो अरहर, तिल और ज्वार की सैकड़ों बीघा फसलें पानी में बर्बाद हो गई हैं। अमलीकौर के प्रधान प्रतिनिधि देशराज सिंह ने नुकसान की पुष्टि करते हुए प्रशासन से मुआवजे की मांग की है।
तिंदवारी, बबेरू और मझीवा क्षेत्रों में भी पानी ने कहर बरपाया है। कई गांवों में दो से चार फीट तक पानी बह रहा है और आवागमन केवल नावों के सहारे संभव है।
एसडीएम अंकित वर्मा ने बताया कि सभी प्रभावित क्षेत्रों में राजस्व विभाग की टीमें निगरानी कर रही हैं। अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज के अनुसार यमुना और केन नदियों का जलस्तर अब भी बढ़ रहा है, जिससे कई राष्ट्रीय और स्थानीय मार्गों पर यातायात बंद हो गया है।
प्रशासन ने यात्रियों को बेंदाघाट पुल, औघासी घाट पुल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। राहत कार्य जारी है।

