Nalanda : बिहार में कृषि उत्पादकता बढ़ाने और किसानों को निर्बाध सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। ‘सात निश्चय-2’ के तहत संचालित ‘हर खेत तक सिंचाई का पानी’ कार्यक्रम को वर्ष 2030 तक विस्तार दिया गया है।
इसी क्रम में 19 अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 11 हजार निजी नलकूपों की स्थापना को मंजूरी दी गई। इसके लिए 305.60 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।
11 हजार नलकूपों के लिए 305.60 करोड़ मंजूर
बिहार की करीब 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। किसानों की आय बढ़ाने और खेती को मौसम की अनिश्चितता से बचाने के लिए सरकार निजी नलकूपों की स्थापना पर जोर दे रही है।
योजना के तहत किसानों को अपने खेतों में बोरिंग और नलकूप लगाने के लिए वित्तीय सहायता और सब्सिडी दी जाएगी। इससे भूजल के माध्यम से खेतों तक सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
7,014 नई योजनाओं से बहाल होगी सिंचाई क्षमता
लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन के अनुसार, भविष्य की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उप विकास आयुक्त (DDC) की अध्यक्षता वाली समिति ने राज्यभर में सतही सिंचाई योजनाओं का व्यापक सर्वेक्षण किया है।
सर्वे के आधार पर 7,014 नई सतही सिंचाई योजनाओं को चिह्नित किया गया है। इन योजनाओं के चरणबद्ध क्रियान्वयन से राज्य में करीब 7,56,380 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता बहाल की जाएगी।
सरकार आहर, पईन और तालाब जैसे पारंपरिक जल स्रोतों के जीर्णोद्धार के जरिए जल संचयन को भी प्राथमिकता दे रही है।
आहर-पईन के जीर्णोद्धार से किसानों को राहत
नालंदा जिले के बिहारशरीफ प्रखंड स्थित तेतरावां पईन के जीर्णोद्धार के बाद इसकी सिंचाई क्षमता बढ़कर 430 हेक्टेयर हो गई है। स्थानीय किसान अरुण सिंह के अनुसार, इससे हजारों बीघा खेतों में पटवन की समस्या दूर हो गई है।
इसी तरह जमुई जिले के सोनो प्रखंड में तालो आहर के पुनरुद्धार से 40 हेक्टेयर कृषि भूमि में खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है।



