Ranchi : नए साल की शुरुआत में झारखंड के स्वास्थ्य तंत्र की चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। राज्यभर के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत 4,468 डॉक्टर और कर्मचारी जनवरी माह में एक भी दिन ड्यूटी पर नहीं आए। 31 दिनों तक इनकी उपस्थिति शून्य दर्ज की गई है। यह खुलासा स्वास्थ्य विभाग के उपस्थिति पोर्टल (ACVMS) के विश्लेषण में हुआ है।
मेडिकल कॉलेज से जिला अस्पताल तक हालात गंभीर
आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल 28,781 डॉक्टर और कर्मचारी उपस्थिति पोर्टल पर पंजीकृत हैं। इनमें से 4,468 पूरे जनवरी नदारद रहे।
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मेडिकल कॉलेजों को छोड़कर तैनात 2,305 डॉक्टरों में से 405 (18%) जनवरी भर अनुपस्थित रहे।
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24,246 कर्मचारियों में से 3,656 (15%) ने पूरे महीने ड्यूटी नहीं की।
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राज्य के छह मेडिकल कॉलेजों में भी स्थिति बेहतर नहीं रही। यहां 2,240 में से 405 डॉक्टर-कर्मियों की उपस्थिति पूरे महीने शून्य पाई गई।
रजिस्ट्रेशन से बच रहे डॉक्टर-कर्मी
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कई डॉक्टर और कर्मचारी जानबूझकर उपस्थिति पोर्टल पर निबंधन नहीं करा रहे, ताकि उनकी निगरानी न हो सके। विभाग अब ऐसे सभी कर्मियों का अनिवार्य पंजीकरण कराने की तैयारी में है।
“हाजिरी नहीं तो वेतन नहीं” की तैयारी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अब उपस्थिति पोर्टल को वेतन भुगतान से जोड़ने जा रहा है। अपर मुख्य सचिव ने साफ कहा है कि आगे से जितने दिन की हाजिरी, उतने दिन का ही वेतन मिलेगा।
एक क्लिक में यह पता चल सकेगा कि कौन कर्मचारी कब, कहां और कितने दिन ड्यूटी पर आया।
हजारीबाग मेडिकल कॉलेज की हालत सबसे खराब
विश्लेषण में सामने आया कि (मेडिकल कॉलेज छोड़कर)
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केवल 31% कर्मचारी और 24% डॉक्टर ऐसे रहे, जिनकी जनवरी में 75% से अधिक उपस्थिति थी।
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SBMCH, हजारीबाग की स्थिति सबसे चिंताजनक पाई गई, जहां उपस्थिति बेहद कमजोर रही।
आयुष्मान योजना में भी सख्ती
इधर, आयुष्मान भारत–मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत 30 दिनों के भीतर मरीजों की दोबारा भर्ती (री-एडमिशन) के मामलों पर भी सख्ती की जा रही है।
झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी (JASAS) ने ऐसे अस्पतालों और पैकेजों की पहचान की है, जहां बार-बार मरीज भर्ती हो रहे हैं। गुणवत्ता, फॉलो-अप और मानक उपचार प्रोटोकॉल के पालन के निर्देश दिए गए हैं।
👉 कुल मिलाकर, झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही बढ़ाने के लिए सरकार अब सख्त कदम उठाने के मूड में है, और “हाजिरी नहीं तो वेतन नहीं” नियम जल्द हकीकत बनने जा रहा है।



