सिंचाई कूप में डूबकर दर्जनों बंदरों की मौत

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Palamu। जिले के पांकी प्रखंड के सोरठ गांव के सिंचाई कुएं में डूबकर करीब 35 से 40 बंदरों की मौत हो गई। हालांकि इसके स्पष्ट आंकड़े सामने नहीं आये हैं। संभावना जताई जा रही है कि सारे बंदर कुएं में प्यास बुझाने के लिए उतरे होंगे और फिर बाहर नहीं निकल पाए। ऐसे में उनकी डूबने से मौत हो गई। पानी के भी विषैला होने की संभावना लगती है। बंदरों की डेड बॉडी देखने से लगती है कि घटना तीन चार दिन पहले की होगी। सूचना मिलने के बाद वन विभाग और प्रशासन मामले की जांच में जुट गया है। वन विभाग द्वारा कुएं से बंदरों के शव निकाले जा रहे हैं। पांकी एवं कुन्दरी वन क्षेत्र के कर्मियों को इसमें लगाया गया है। जिस जगह यह घटना हुई, वह सुदूरवर्ती और जंगली क्षेत्र प्रतीत होता है।

भीषण गर्मी पड़ने के कारण जंगलों में जलाशय सूख चुके हैं। जलाशयों में पानी नहीं रहने के कारण जंगलों में रहने वाले जानवर आबादी वाले इलाके में अपनी प्यास बुझाने के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसी संभावना है कि पानी की तलाश में भटक रहे बंदर उक्त कुएं को देखकर अपनी प्यास बुझाने के लिए उतरे होंगे, लेकिन बाहर नहीं निकल सके होंगे।

रविवार की शाम सोरठ इलाके में मवेशी चराने के चरवाहों ने दुर्गंध महसूस करके कुएं में झांका तो एक साथ कई बंदरों की डेड बॉडी कुएं में नजर आई। बाद में इसकी जानकारी गांव वालों को हुई। ग्रामीणों का कहना है कि घटना के संबंध में उन्हें भी कोई जानकारी नहीं है, लेकिन संभावना है कि बुधवार या गुरुवार को यह घटना हुई होगी। कुआं जमीन की सतह से बराबर पर बना हुआ है।

कुएं के अंदर उतरने के लिए लोहे की कड़ी भी लगी हुई है। कुएं का प्लास्टर किया गया है, लेकिन पानी को देखने से स्पष्ट होता है कि इसका इस्तेमाल लंबे समय से नहीं किया जा रहा होगा। पानी काला पड़ गया है। कुएं में गंदगी भी नजर आई है। कुएं के पानी की भी जांच होनी चाहिए, ताकि मौत का कारण स्पष्ट हो सके। ऐसा नहीं है कि बंदर कुएं के ऊपरी सतह से नीचे छलांग लगा दिए होंगे। कड़ी लगे होने कारण कुएं में उतरने के लिए बंदरों द्वारा कड़ी का इस्तेमाल किया गया होगा, लेकिन पानी पीने के बाद उनकी स्थिति बिगड़ गई होगी, इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता है।

मामले में मेदिनीनगर के वन प्रमंडल पदाधिकारी कुमार आशीष का कहना है कि सारे बंदरों के शव निकाले जा रहे हैं। सभी का पोस्टमार्टम किया जायजा।

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