Ranchi : बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने खेसारी चारा फसल की नई उन्नत किस्म ‘बिरसा खेसारी-1’ विकसित की है, जिसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने उत्तर पूर्वी और मध्य भारत के लिए जारी करने की अनुशंसा की है।
Also Read : झारखंड केंद्रीय व बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की इकाई गठित
इस किस्म की औसत उपज 190 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जो मौजूदा नेशनल चेक किस्म महाटेवरा से 6.3% अधिक है। इसमें क्रूड प्रोटीन की मात्रा 20.7% है और यह लीफ ब्लाइट रोग के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है। यह सीमित सिंचाई और सामान्य उर्वरता वाली भूमि के लिए उपयुक्त है।
इस विकास में डॉ योगेंद्र प्रसाद और डॉ बिरेंद्र कुमार की अहम भूमिका रही, जो पिछले एक दशक से इस पर शोध कर रहे थे। किस्म को 22-23 अप्रैल को धारवाड़, कर्नाटक में हुई ICAR की वार्षिक बैठक में प्रस्तुत किया गया।
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एससी दुबे, अनुसंधान निदेशक डॉ पीके सिंह और विभागाध्यक्ष डॉ मणिगोपा चक्रवर्ती ने वैज्ञानिकों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।
यह किस्म झारखंड समेत देशभर में हरे चारे की कमी को दूर करने में सहायक साबित हो सकती है।

