Ranchi : कंकें प्रखंड के पिठोरिया स्थित सुतियाम्बे गांव में स्थित अंधेरी तालाब इन दिनों ग्रामीणों की चिंता और आक्रोश का केंद्र बन गया है। कभी किसानों के लिए जीवनदायिनी जल स्रोत रहा यह तालाब, आज लघु सिंचाई विभाग की संदिग्ध कार्यशैली के कारण विवादों में है।

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योजना में पारदर्शिता का अभाव:
तालाब के जीर्णोद्धार कार्य की शुरुआत तो हुई, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि योजना स्थल पर न तो कोई सूचना बोर्ड है, न बजट का ब्योरा और न ही कार्य अवधि की जानकारी। इस कारण यह पूरा प्रोजेक्ट रहस्यमय और अपारदर्शी बन गया है।
गहराई में नहीं, सिर्फ सतह पर हो रही खुदाई:
ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब की गहराई नहीं बढ़ाई जा रही, बल्कि सिर्फ ऊपरी सतह पर लीपापोती हो रही है। इससे तालाब की जल संचयन क्षमता प्रभावित होगी और उसका सिंचाई में उपयोग भी सीमित हो जाएगा।
किसानों का संकट:
यह तालाब क्षेत्र के सैकड़ों किसानों के लिए सिंचाई का प्रमुख साधन है। अधूरी और संदेहास्पद योजना से उनका भविष्य अंधकारमय होता नजर आ रहा है। एक किसान की पीड़ा छलक उठी – “अगर यही हाल रहा, तो खेती छोड़नी पड़ेगी। खेत सूखेंगे, फसल बर्बाद होगी और पेट पालना मुश्किल हो जाएगा।”
कोई जवाबदेही नहीं:
ग्रामीणों का कहना है कि कार्यस्थल पर न तो कोई अधिकारी आता है, न संवेदक दिखता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस योजना की निगरानी कौन कर रहा है? नियमों के अनुसार बिना सूचना बोर्ड के कोई भी सरकारी कार्य मान्य नहीं माना जा सकता।
ग्रामीणों की मांगें:
- योजना का सूचना बोर्ड तत्काल स्थापित किया जाए
- तकनीकी जांच कर कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए
- संवेदक की जवाबदेही तय हो
- योजना की सभी जानकारियां सार्वजनिक की जाएं
ग्रामीणों ने रांची उपायुक्त से तत्काल जांच की मांग की है और जल्दी सुधार नहीं हुआ, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

