New Delhi : अगर मन लगातार भारी महसूस हो, ऊर्जा की कमी बनी रहे और बिना वजह मूड बार-बार बदलता रहे, तो इसे सामान्य थकान समझकर अनदेखा करना खतरनाक हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति शरीर में हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकती है। आयुर्वेद इसे केवल मानसिक समस्या नहीं, बल्कि मन और शरीर दोनों से जुड़ा विकार मानता है।
आयुर्वेदाचार्यों के मुताबिक, थायरॉयड, कोर्टिसोल और न्यूरो-हार्मोन के असंतुलन से व्यक्ति सुस्ती, चिड़चिड़ापन, घबराहट और उदासी महसूस करने लगता है। जब थायरॉयड ग्रंथि सुस्त हो जाती है, तो मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ता है, जिससे शरीर और मन दोनों थकान से भर जाते हैं। वहीं, कोर्टिसोल हार्मोन के बढ़ने से तनाव, भय और बेचैनी बढ़ती है, जो धीरे-धीरे डिप्रेशन जैसे लक्षण पैदा कर सकती है।
आयुर्वेद में इस स्थिति को मुख्य रूप से वात दोष और तमोगुण के असंतुलन से जोड़ा गया है। वात बढ़ने पर नींद टूटती है, फोकस कमजोर होता है और मूड अस्थिर रहता है। तमोगुण की अधिकता से मन भारी, उदास और निष्क्रिय महसूस करने लगता है।
इस समस्या से राहत के लिए आयुर्वेद कई प्राकृतिक उपाय सुझाता है। अश्वगंधा तनाव कम कर कोर्टिसोल को संतुलित करने में सहायक मानी जाती है। शंखपुष्पी और ब्राह्मी मस्तिष्क को शांत कर फोकस और मूड बेहतर बनाती हैं। जटामांसी गहरी नींद और मानसिक स्थिरता में मदद करती है, जबकि कुमारी (एलोवेरा) थायरॉयड संतुलन में सहायक होती है।
योग और प्राणायाम भी हार्मोन संतुलन में अहम भूमिका निभाते हैं। अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, उज्जायी प्राणायाम और सूर्य नमस्कार से नाड़ियों को शांति मिलती है और मन हल्का महसूस होता है। आहार में हल्का, सुपाच्य भोजन, तिल, बादाम, घी, गर्म दूध और हल्दी-दालचीनी को शामिल करने की सलाह दी जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि समय रहते ध्यान देने से मानसिक और शारीरिक संतुलन दोबारा पाया जा सकता है।

