रिम्स जमीन घोटाला: हाई कोर्ट सख्त, अफसरों पर FIR, पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश

Ranchi : झारखंड हाई कोर्ट ने रिम्स (राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) परिसर में जमीन के अवैध आवंटन और रजिस्ट्री मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि इस घोटाले में जिम्मेदार सभी सरकारी अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया

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Ranchi : झारखंड हाई कोर्ट ने रिम्स (राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) परिसर में जमीन के अवैध आवंटन और रजिस्ट्री मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि इस घोटाले में जिम्मेदार सभी सरकारी अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाए। साथ ही, जिन लोगों को बेदखल किया गया या परेशान किया गया, उन्हें सरकारी अधिकारियों और बिल्डरों की ओर से उचित मुआवजा दिया जाए।

मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की डिवीजन बेंच ने ज्योति शर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस को आदेश दिया कि उन अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए जिन्होंने कथित तौर पर बिल्डरों के साथ मिलीभगत कर रिम्स की जमीन पर अवैध कब्जा कराया।

20 दिसंबर के फैसले में कोर्ट ने कहा कि जमीन के रजिस्ट्रेशन से जुड़े अधिकारियों को अधिक सतर्क रहना चाहिए था। उनकी लापरवाही के कारण कई लोगों को रिम्स की अधिग्रहित जमीन से हटाया गया। कोर्ट ने हैरानी जताई कि निर्माण कार्य जारी रहने के बावजूद रिम्स प्रशासन लंबे समय तक चुप रहा।

जनहित याचिका 2018 में दायर हुई थी, लेकिन अस्पताल ने कभी कोर्ट को यह जानकारी नहीं दी कि उसकी जमीन पर कब्ज़ा हो चुका है। मामला तब उजागर हुआ जब झारखंड लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के सदस्य सचिव ने जांच की और पाया कि रिम्स परिसर में करीब 7 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा था।

इसके बाद हाई कोर्ट ने 3 दिसंबर को प्रशासन को 72 घंटे के भीतर सभी अवैध कब्जे हटाने का आदेश दिया। आदेश के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की और रिम्स की जमीन पर बनी इमारतों को गिराया। कोर्ट ने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड हमेशा उपलब्ध थे, लेकिन अधिकारी सक्रिय नहीं हुए। निजी पक्षों के पक्ष में बार-बार टाइटल बदले गए और राजस्व रिकॉर्ड व गैर-देनदारी प्रमाण पत्रों में हेरफेर किया गया।

मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी 2026 को होगी।

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