94,000 टन एलपीजी के टैंकर भारत की ओर, मध्य पूर्व तनाव के बीच

New Delhi : मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है। फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास भारत आने वाले 28 तेल और गैस टैंकर फंसे हुए हैं। इनमें 10 विदेशी झंडे वाले और 18 भारतीय

94,000 टन एलपीजी के टैंकर भारत की ओर, मध्य पूर्व तनाव के बीच
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New Delhi : मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है। फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास भारत आने वाले 28 तेल और गैस टैंकर फंसे हुए हैं। इनमें 10 विदेशी झंडे वाले और 18 भारतीय झंडे वाले जहाज शामिल हैं, जो कच्चा तेल, एलपीजी और एलएनजी लेकर भारत की ओर आ रहे थे।

पोर्ट्स, शिपिंग और वॉटरवेज मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि विदेशी जहाजों में 3 एलपीजी, 4 क्रूड ऑयल और 3 एलएनजी टैंकर शामिल हैं, जबकि भारतीय जहाजों में एलपीजी, एलएनजी और कच्चा तेल ले जा रहे कई टैंकर होर्मुज के पास रुके हुए हैं। ये जहाज उस लगभग 500 जहाजों के समूह का हिस्सा हैं जो इस रणनीतिक जलमार्ग में फंसे हुए हैं।

इन जहाजों पर कुल 485 भारतीय नाविक सवार हैं। सरकार की पहली प्राथमिकता भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षित निकासी है। अब तक 8 भारतीय जहाजों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। इनमें दो प्रमुख एलपीजी टैंकर BW TYR और BW ELM शामिल हैं, जिनमें कुल 94,000 टन एलपीजी लदी हुई है। इनमें से एक आज और दूसरा 1 अप्रैल तक भारत पहुंचेगा।

पहले ही कुछ जहाज सुरक्षित भारत पहुँच चुके हैं:

  • Pine Gas और Jag Vasant – 92,612 टन एलपीजी, 26 मार्च को भारत।
  • MT Shivalik और MT Nanda Devi – क्रमशः 16 और 17 मार्च को मुंद्रा और कांडला।
  • Jag Ladki – 80,886 टन कच्चा तेल, 18 मार्च को मुंद्रा पोर्ट।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय नौसेना लगातार निगरानी में है और अब तक 6 जहाजों को सुरक्षित भारत लाने में मदद की गई। अधिकारियों के अनुसार, केवल होर्मुज जलडमरूमध्य ही नहीं, बल्कि इसके आसपास का क्षेत्र भी हाई-रिस्क जोन बना हुआ है।

यह संकट भारत के लिए इस जलमार्ग की रणनीतिक महत्ता को उजागर करता है, क्योंकि भारत के तेल-गैस आयात का बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है। सरकार और नौसेना अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ मिलकर समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करने में जुटी हुई हैं।

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