मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, B1 पुल पर हमले के बाद ईरान का पलटवार तैयार

New Delhi : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच हालात और गंभीर हो गए हैं। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के महत्वपूर्ण B1 पुल पर किए गए हमले के बाद क्षेत्र में संघर्ष और तेज होता नजर आ रहा है। इस हमले के बाद

मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, B1 पुल पर हमले के बाद ईरान का पलटवार तैयार
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New Delhi : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच हालात और गंभीर हो गए हैं। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के महत्वपूर्ण B1 पुल पर किए गए हमले के बाद क्षेत्र में संघर्ष और तेज होता नजर आ रहा है। इस हमले के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई के संकेत दिए हैं, जिससे स्थिति और विस्फोटक बन गई है।

बताया जा रहा है कि जिस B1 पुल को निशाना बनाया गया, वह ईरान का सबसे ऊंचा पुल था और अभी निर्माणाधीन था। लगभग 136 मीटर ऊंचा यह पुल तेहरान को कराज शहर से जोड़ने के लिए बनाया जा रहा था। हमले में पुल को आंशिक नुकसान पहुंचा है और कई लोग घायल हुए हैं।

इस घटना के बाद ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने एक सूची जारी की है, जिसमें खाड़ी देशों और जॉर्डन के आठ प्रमुख पुलों को संभावित निशाने के रूप में चिन्हित किया गया है। यह सूची इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ी बताई जा रही है।

इस सूची में कुवैत का शेख जाबेर अल-अहमद अल-सबाह कॉजवे, संयुक्त अरब अमीरात के शेख जायद पुल, अल मकता पुल और शेख खलीफा पुल, सऊदी अरब और बहरीन को जोड़ने वाला किंग फहद कॉजवे, और जॉर्डन के किंग हुसैन पुल, दामिया पुल और अब्दौन पुल शामिल हैं। ये सभी पुल क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए बातचीत के लिए तैयार नहीं होता, तो उसे और बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि B1 पुल को भारी नुकसान पहुंचा है और आगे भी कार्रवाई जारी रह सकती है।

ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, इस हमले में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 95 लोग घायल हुए हैं। बताया जा रहा है कि कई लोग पास में एक सार्वजनिक आयोजन में शामिल थे, जब यह हमला हुआ।

वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि नागरिक ढांचे पर हमला करने से ईरान को झुकाया नहीं जा सकता। उन्होंने इसे विरोधियों की कमजोरी और हताशा का संकेत बताया।

इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के हमले जारी रहे, तो यह संघर्ष पूरे क्षेत्र में बड़े युद्ध का रूप ले सकता है और व्यापार व सुरक्षा पर गहरा असर डाल सकता है।

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