Ranchi : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम विवाद की जांच तेज हो गई है। मामले में सीआईडी (CID) की छापेमारी और पूछताछ जारी है। जांच के तहत उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता से देर रात से पूछताछ की जा रही है। सीआईडी अधिकारी इच्छा कुमारी के नेतृत्व में चल रही जांच के दौरान आयोग की परीक्षा व्यवस्था से जुड़े कई अहम पहलू सामने आ रहे हैं।
परीक्षा परिणाम को लेकर उठे विवाद के बीच परीक्षा शाखा में अधिकारियों से आनन-फानन में कार्यभार वापस लेने की घटनाओं ने आयोग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिकायत के बाद बदले गए परीक्षा नियंत्रक
सूत्रों के अनुसार, आयोग के एक सदस्य ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जेपीएससी में कथित अनियमितताओं की शिकायत की थी और पूरे मामले की जांच की मांग की थी। शिकायत में परीक्षा शाखा से जुड़े अधिकारियों और नियुक्ति एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए थे।
बताया गया है कि तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोट्टा ने नियुक्ति एजेंसी के कामकाज को लेकर आयोग के अध्यक्ष से शिकायत की थी। इसके बाद उन्हें परीक्षा संबंधी जिम्मेदारियों से हटा दिया गया। बाद में लोकेश मिश्रा को परीक्षा नियंत्रक बनाया गया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उन्हें भी परीक्षा कार्य से मुक्त कर दिया गया।
तबादले के बाद भी संभालती रहीं परीक्षा की जिम्मेदारी
इसके बाद उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता को परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य सौंप दिए गए।
जांच के दौरान सामने आया कि श्वेता गुप्ता का 22 मई को ही खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता विभाग में तबादला हो चुका था। इसके बावजूद उन्हें जेपीएससी से कार्यमुक्त (रिलीव) नहीं किया गया और परीक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां उनके पास ही बनी रहीं।
इस घटनाक्रम ने आयोग की प्रशासनिक प्रक्रिया पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं कि तबादले के बावजूद उन्हें संवेदनशील परीक्षा कार्य क्यों सौंपे गए।
CID जांच में कई सवालों के जवाब तलाशे जा रहे
सीआईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा नियंत्रकों को बार-बार बदले जाने, शिकायत करने वाले अधिकारियों को परीक्षा कार्य से हटाने और तबादले के बाद भी अधिकारी को परीक्षा संबंधी जिम्मेदारियां सौंपे जाने के पीछे क्या कारण थे।
14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम विवाद के बाद अब सवाल केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जेपीएससी की पूरी परीक्षा प्रणाली, प्रशासनिक निर्णयों और परीक्षा प्रबंधन की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ गई है।



