Patna News: बिहार में बाढ़ का पानी कम होने के साथ अब स्वास्थ्य विभाग ने संभावित बीमारियों और संक्रमण से निपटने के लिए अपना अभियान तेज कर दिया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को इलाज, दवाएं और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बड़े स्तर पर मेडिकल कैंप और मोबाइल स्वास्थ्य टीमें तैनात की गई हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य में अब तक 1,758 चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं। वहीं, 343 मोबाइल मेडिकल टीमों के जरिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर जाकर लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा रही हैं। इन टीमों के माध्यम से अब तक 2,92,584 मरीजों का ओपीडी में इलाज किया जा चुका है। इसके अलावा संक्रमण से बचाव के लिए 1,29,214 लोगों को हैलोजन टैबलेट वितरित की गई हैं।
15 जिलों के 1,687 गांव बाढ़ से प्रभावित
इस वर्ष अलग-अलग नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण बिहार के 15 जिलों के 1,687 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोगों के स्वास्थ्य पर संक्रमण और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में इलाज और निगरानी की व्यवस्था बढ़ाई है। मेडिकल टीमों को दूर-दराज के गांवों तक पहुंचाने के लिए 47 बोट एंबुलेंस भी तैनात की गई हैं। इनके जरिए स्वास्थ्यकर्मी बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंचकर लोगों की जांच, स्वास्थ्य परामर्श और जरूरत के अनुसार दवाओं का वितरण कर रहे हैं।
2,323 गांवों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव
बाढ़ के बाद संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में साफ-सफाई और कीटाणु नियंत्रण पर भी जोर दिया जा रहा है। विभाग के मुताबिक, 2,323 गांवों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया गया है। इसका उद्देश्य बाढ़ के पानी के कारण पैदा होने वाले संक्रमण के खतरे को कम करना है।
गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों पर विशेष निगरानी
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं, नवजात बच्चों, गंभीर रूप से बीमार लोगों और गैर-संचारी रोगों से पीड़ित मरीजों की पहचान के लिए विशेष व्यवस्था की है।
इसके लिए आशा, आशा फैसिलिटेटर और एएनएम की 536 टीमें तैनात की गई हैं। इन टीमों की जिम्मेदारी में कई महत्वपूर्ण काम शामिल हैं—
- गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों की निगरानी
- गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार और दवा उपलब्ध कराना
- सुरक्षित प्रसव के लिए जरूरी सहायता
- जरूरत पड़ने पर मरीजों को अस्पताल रेफर करना
- डायरिया और अन्य संक्रमण के मामलों पर नजर रखना
- बाढ़ प्रभावित परिवारों तक स्वास्थ्य संबंधी सलाह पहुंचाना
स्वास्थ्य विभाग का फोकस खास तौर पर उन लोगों पर है जिन्हें बाढ़ के कारण समय पर अस्पताल पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
इन 15 जिलों में बाढ़ का असर
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अरवल, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, बक्सर, कटिहार, खगड़िया, मुंगेर, पटना, समस्तीपुर, सारण, वैशाली, लखीसराय, पूर्णिया और मधेपुरा के कई गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इन जिलों में स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता और राहत से जुड़े विभाग आपसी समन्वय के साथ काम कर रहे हैं।
16 जिलों की 300 पंचायतों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था
बाढ़ प्रभावित इलाकों में बीमारी रोकने के लिए इलाज के साथ सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है। इसी दिशा में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) की ओर से भी कई कदम उठाए गए हैं। विभाग के अनुसार, बाढ़ प्रभावित 16 जिलों के 72 प्रखंडों की 300 ग्राम पंचायतों में लगातार स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। इसके लिए क्षतिग्रस्त चापाकलों की मरम्मत, टैंकरों से पानी की आपूर्ति और वाटर एटीएम के जरिए पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
444 से अधिक चापाकलों का डिसइन्फेक्शन
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ प्रभावित इलाकों में 444 से अधिक चापाकलों का डिसइन्फेक्शन यानी कीटाणुशोधन किया गया है। वहीं, 125 से अधिक क्षतिग्रस्त चापाकलों की मरम्मत भी कराई गई है। आपात स्थिति में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में 147 पानी के टैंकर और एक वाटर एटीएम चालू रखा गया है। इसके अलावा कई जलापूर्ति योजनाओं के माध्यम से भी पानी पहुंचाया जा रहा है।
राहत शिविरों में 1,662 शौचालय और 153 स्नानागार
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए बनाए गए राहत शिविरों में स्वच्छता का भी ध्यान रखा जा रहा है। विभाग के अनुसार, राज्य में संचालित 147 राहत शिविरों में 1,662 शौचालय और 153 स्नानागार बनाए गए हैं। इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 167 जलस्रोतों की जांच की गई है, ताकि दूषित या संक्रमित पानी की आपूर्ति के खतरे को कम किया जा सके।
बाढ़ के बाद स्वास्थ्य सुरक्षा पर बढ़ा फोकस
बिहार में बाढ़ की स्थिति के बाद स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती जलजनित बीमारियों और संक्रमण को रोकना है। इसके लिए एक तरफ मोबाइल मेडिकल टीमें गांव-गांव पहुंच रही हैं, वहीं दूसरी ओर पेयजल, कीटाणुशोधन और स्वच्छता की व्यवस्था पर भी काम किया जा रहा है।
मेडिकल कैंप, बोट एंबुलेंस, मोबाइल स्वास्थ्य टीमें और सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था के जरिए प्रभावित आबादी तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। आने वाले दिनों में भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बीमारी की स्थिति पर निगरानी बनाए रखना अहम होगा।



