Patna: स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और ऑनलाइन शॉपिंग के दौर में अगर युवा किसी पारंपरिक मेले में खरीदारी और तस्वीरों के लिए पहुंच रहे हों, तो यह अपने आप में खास बात है। पटना के ज्ञान भवन में चल रहा बिहार सरस मेला 2026 इन दिनों युवाओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां ग्रामीण महिलाओं के हाथों से तैयार उत्पादों में पारंपरिक कला के साथ आधुनिक डिजाइन और फैशन की झलक देखने को मिल रही है। सरस मेला केवल खरीदारी का बाजार नहीं है। यह ग्रामीण महिला उद्यमियों, स्थानीय कारीगरों और उनके हुनर को बड़े बाजार से जोड़ने का मंच भी है। मेले में जीविका दीदियों के स्टॉल पर जूट के उत्पाद, मिथिला पेंटिंग, सिक्की से बनी वस्तुएं, लकड़ी के सामान, खादी के कपड़े और हस्तनिर्मित ज्वेलरी लोगों का ध्यान खींच रहे हैं।
फूड कोर्ट में भी दिख रहा युवाओं का उत्साह
सरस मेले का आकर्षण सिर्फ हस्तशिल्प और ग्रामीण उत्पादों तक सीमित नहीं है। यहां आने वाले लोगों के लिए अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेने का विकल्प भी मौजूद है। फूड कोर्ट में बिहार के लोकप्रिय लिट्टी-चोखा के साथ दक्षिण भारतीय व्यंजन और दूसरे पारंपरिक पकवान भी उपलब्ध हैं। इससे मेले में खरीदारी के साथ खान-पान और सांस्कृतिक अनुभव का भी जुड़ाव हो रहा है।
जीविका दीदियों के हुनर को मिल रहा नया बाजार
बिहार सरस मेला ग्रामीण महिलाओं के लिए अपने उत्पादों को ग्राहकों तक पहुंचाने का बड़ा मंच भी बन रहा है। जीविका से जुड़ी महिलाएं अपने पारंपरिक हुनर को नए डिजाइन के साथ बाजार में पेश कर रही हैं। इन महिलाओं के उत्पादों में स्थानीय कला और संस्कृति की झलक के साथ आज की जरूरत और पसंद का भी ध्यान रखा जा रहा है। यही बदलाव युवाओं को इन स्टॉल तक ला रहा है।
रूबरू होइए जीविका दीदियों से, जानिए सफलता की कहानी
आज बात उन जीविका दीदियों की, जिन्होंने अपने पारंपरिक हुनर में आधुनिक डिजाइन और नए अंदाज का ऐसा मेल किया है कि उनके प्रोडक्ट युवाओं को खूब पसंद आ रहे हैं। इन जीविका दीदियों के स्टॉल युवाओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। पारंपरिक कला और आधुनिक सोच के इस खूबसूरत संगम ने उनके उत्पादों को नया रूप दिया है। खूबसूरत डिजाइन, आधुनिक लुक और स्थानीय हुनर से तैयार ये प्रोडक्ट न सिर्फ युवाओं की पसंद बन रहे हैं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की प्रतिभा और उद्यमिता को भी नई पहचान दे रहे हैं। सरस मेला इस बदलाव की एक ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, जहां परंपरा भी है और आधुनिकता का अंदाज भी।
अररिया जिला की रहने वाली शीतला दीदी अपने हाथों और मशीन की सहायता से तैयार किए गए आकर्षक जूट उत्पादों के साथ सरस मेला में पहुंची हैं। उनका हुनर ग्रामीण महिला उद्यमिता और स्थानीय उत्पादों की समृद्ध पहचान को दर्शाता है।

शीतला देवी बताती हैं कि, “जूट से बने खिलौने, घर सजाने वाली वस्तुएं, बैग जैसी कई प्रोडक्ट बनाती हूं। हम लोग 20 दीदियां इस काम से जुड़ी हुई हैं। ट्रेनिंग मिलने के बाद प्रोडक्ट के अलग-अलग डिजाइन बनाने का काम भी मैंने शुरू किया है। जब युवा लोग इसे देखने के लिए आते हैं तो खुश होते हैं कि यह सामान उन्हें दूसरी जगह नहीं मिलेगा।”
मधुबनी जिला की पूनम दीदी वर्ष 2010 से जीविका से जुड़ी हुई हैं। वर्ष 2022 से हम लोग सरस मेला में आ रहे हैं। पूनम दीदी बताती हैं कि, “मिथिला पेंटिंग, सिक्की के प्रोडक्ट और पेपर मशीन का सामान हम लोग बेच रहे हैं। सभी वर्ग के लोग आ रहे हैं।” वहीं, अरवल जिला की रिंकी दीदी बताती हैं कि, “हम लोग लकड़ी से बने कई प्रोडक्ट बेच रहे हैं। बच्चों से लेकर युवा, हर कोई खरीद रहा है।”

कला सिर्फ रंगों का मेल नहीं, बल्कि हमारी मिट्टी, परंपरा और पहचान की झलक है। बिहार की मशहूर मधुबनी पेंटिंग की इसी विरासत को सुपौल जिला की मिक्की दीदी अपने हुनर से आगे बढ़ा रही हैं। पटना के ज्ञान भवन में आयोजित सरस मेला में उन्होंने अपना खूबसूरत स्टॉल सजाया है।

मिक्की दीदी बताती हैं कि, “हम लोग 10 से 12 जीविका दीदी इस काम में लगी हुई हैं। सोशल मीडिया की वजह से युवाओं के बीच मिथिला पेंटिंग काफी फेमस हो गई है। एक ट्रेंड और फैशन के तौर पर इसकी बिक्री भी काफी बढ़ी है। मिथिला पेंटिंग से सजे कई प्रोडक्ट हम लोग बेच रहे हैं।”



