‘गंदे वीडियो देखते हो…’ कहकर DCP क्राइम बन ठगी, कानपुर में बड़ा खुलासा

Kanpur : उत्तर प्रदेश के कानपुर में खुद को डीसीपी क्राइम बताकर लोगों को डराने और बदनामी की धमकी देकर पैसे ऐंठने वाले साइबर ठग गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है। अश्लील वीडियो देखने का झूठा आरोप लगाकर गिरफ्तारी का डर दिखाने वाले इस गिरोह

‘गंदे वीडियो देखते हो…’ कहकर DCP क्राइम बन ठगी, कानपुर में बड़ा खुलासा
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Kanpur : उत्तर प्रदेश के कानपुर में खुद को डीसीपी क्राइम बताकर लोगों को डराने और बदनामी की धमकी देकर पैसे ऐंठने वाले साइबर ठग गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है। अश्लील वीडियो देखने का झूठा आरोप लगाकर गिरफ्तारी का डर दिखाने वाले इस गिरोह ने कई लोगों से हजारों रुपये की ठगी की। साइबर क्राइम पुलिस ने दो सगे भाइयों समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

मामले का खुलासा श्रावस्ती निवासी प्रमोद कुमार की शिकायत के बाद हुआ। प्रमोद को एक कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को “कानपुर से डीसीपी क्राइम” बताते हुए कहा कि उसके मोबाइल डेटा की जांच में आपत्तिजनक वीडियो देखने की पुष्टि हुई है। कॉलर ने दावा किया कि उसके खिलाफ केस दर्ज हो चुका है और पुलिस टीम उसके घर रवाना है।

कॉलर ने प्रमोद को गिरफ्तारी से बचने के लिए तुरंत पैसे ट्रांसफर करने को कहा। घबराए प्रमोद ने शुरुआत में कॉल को सही मान लिया और माफी मांगने लगे। ठगों ने 50 हजार रुपये की मांग की, लेकिन रकम कम होने पर उपलब्ध पैसे भेजने को कहा। इसके बाद प्रमोद ने यूपीआई के जरिए 46 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।

कुछ समय बाद प्रमोद ने यह बात एक जानकार को बताई, जिसने इसे साइबर ठगी बताया। इसके बाद प्रमोद कानपुर साइबर क्राइम थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने 17 दिसंबर को मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।

जांच में सामने आया कि गिरोह अब तक करीब सात लोगों को इसी तरह निशाना बना चुका था। कॉल करने वालों की कानपुरिया बोली और लहजा पुलिस के लिए अहम सुराग साबित हुआ। इसके बाद पुलिस ने कानपुर देहात के गजनेर क्षेत्र से सगे भाई सुरेश और दिनेश, दुर्गापुरवा-नारायणपुर निवासी पंकज सिंह, और बर्रा-2 क्षेत्र के अमन विश्वकर्मा व विनय सोनकर को गिरफ्तार कर लिया।

डीसीपी क्राइम अतुल श्रीवास्तव के मुताबिक, आरोपी खेतों और जंगलों में बैठकर कॉल करते थे। एक आरोपी अधिकारी बनकर बात करता था, जबकि दूसरा मोबाइल में पहले से रिकॉर्ड पुलिस सायरन और गाड़ियों के हॉर्न की आवाज चलाता था। इससे पीड़ित को लगता था कि पुलिस सच में उसके घर पहुंच रही है।

पुलिस के अनुसार, पंकज सिंह बीए पास है, जबकि अन्य आरोपी आठवीं से इंटर तक पढ़े हैं। वे अखबारों और सोशल मीडिया से पुलिस अधिकारियों और गश्त की जानकारी जुटाते थे और खुद को कानपुर पुलिस कमिश्नरेट का अफसर बताकर लोगों को डराते थे। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर गिरोह तक पहुंचा गया है, जबकि कुछ आरोपी अभी फरार हैं।

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