चतरा: नॉर्थ कर्णपुरा कोलफील्ड की आम्रपाली ओपेन कास्ट माइंस की सुरक्षा व्यवस्था 18 सितंबर से केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के हवाले होगी। कोयला चोरी और अवैध कारोबार की शिकायतों को देखते हुए खदान की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का फैसला लिया गया है। आम्रपाली प्रोजेक्ट झारखंड की प्रमुख कोयला खदानों में शामिल है। यहां रोजाना करीब 70 हजार टन कोयले का उत्पादन होने की जानकारी है। नई व्यवस्था के तहत खदान और कोयले के परिवहन पर पहले से ज्यादा निगरानी रखी जाएगी।
200 जवानों की हुई तैनाती
फिलहाल आम्रपाली प्रोजेक्ट में सीआईएसएफ के करीब 200 जवानों की तैनाती की गई है। आने वाले दिनों में जवानों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए डीआईजी स्तर के एक विशेष पद की भी व्यवस्था की गई है। सीआईएसएफ के डीजी 17 सितंबर को झारखंड दौरे पर आएंगे। 18 सितंबर को रांची से आम्रपाली प्रोजेक्ट की नई सुरक्षा व्यवस्था की शुरुआत की जाएगी।
कोयला चोरी रोकने पर जोर
झारखंड में कोयला चोरी रोकने के लिए केंद्र सरकार की ओर से जीरो कोल लीकेज अभियान पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत सीआईएसएफ, राज्य पुलिस और कोयला कंपनी के बीच समन्वय बढ़ाने की तैयारी है। एक आंतरिक रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि चतरा और हजारीबाग की मगध और आम्रपाली खदानों से हर साल बड़ी मात्रा में कोयले की चोरी की शिकायतें सामने आती हैं। इन्हें रोकने के लिए सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
ड्रोन और जीपीएस से होगी निगरानी
जीरो कोल लीकेज योजना के तहत खदानों की निगरानी में तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके लिए:
- ड्रोन से पेट्रोलिंग की जाएगी।
- ट्रकों और डंपरों की जीपीएस से निगरानी होगी।
- वेजब्रिज के जरिए कोयले का वजन दर्ज किया जाएगा।
- वाहनों की आवाजाही पर नजर रखी जाएगी।
- संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी के लिए अलर्ट सिस्टम बनाया गया है।
इन सभी व्यवस्थाओं को इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम से जोड़ने की तैयारी है। बताया गया है कि पिछले दो महीनों में अभियान के तहत छह करोड़ रुपये से अधिक का अवैध कोयला जब्त किया गया है। अब आम्रपाली प्रोजेक्ट में सीआईएसएफ की तैनाती के बाद कोयला चोरी और अवैध गतिविधियों पर निगरानी और बढ़ने की उम्मीद है।


