मुकेश रंजन
Ranchi : राजधानी रांची के कांके क्षेत्र में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) की हालत आज बदहाली की मिसाल बन चुकी है। दो मंजिला यह सरकारी भवन वर्षों से वीरान पड़ा है, और इसके सामने खड़ा एक सूखा पेड़ मानो इस उपेक्षा की मूक गवाही दे रहा हो। जहां यह केंद्र ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाके के लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया था, आज वह खुद “बीमार” स्थिति में है।
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इस भवन की दीवारों पर फैली कालिख, टूटे-फूटे हिस्से और लंबे समय से बंद पड़े दरवाजे स्पष्ट संकेत हैं कि यह ढांचा अब सिर्फ एक नाम मात्र की सरकारी संपत्ति बन कर रह गया है। आसपास की उगी झाड़ियाँ, बिखरा कचरा और निस्तेज माहौल इस ओर इशारा करते हैं कि वर्षों से इसकी सुध किसी ने नहीं ली।
स्थानीय निवासी बताते हैं कि इस भवन का निर्माण कई साल पहले किया गया था, लेकिन कभी नियमित स्वास्थ्य सेवाएं शुरू ही नहीं हुईं। कुछ लोगों का मानना है कि यह भवन एक अधूरी सरकारी परियोजना है, जो शिलान्यास और उद्घाटन के फोटोज़ तक ही सीमित रह गई।
प्रशासनिक उदासीनता या राजनीतिक उपेक्षा?
यह सवाल अब हर स्थानीय की जुबान पर है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी है और अगर यह केंद्र चालू होता, तो ग्रामीणों को इलाज के लिए शहर नहीं भागना पड़ता।
क्या कोई समाधान है?
स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि वह इस भवन की स्थिति की जांच करे और इसे फिर से क्रियाशील बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए। यह न केवल एक सरकारी संसाधन का पुनः उपयोग होगा, बल्कि क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
निष्कर्ष:
कांके का यह सूना पड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एक चेतावनी है—अगर समय रहते ध्यान न दिया गया, तो ऐसे कई सरकारी भवन महज खंडहर बनकर रह जाएंगे। जरूरत है जिम्मेदारी लेने की, और एक स्पष्ट नीति की, जो जनहित के इन ढांचों को सिर्फ ईंट-पत्थर नहीं, बल्कि सेवा का केंद्र बना सके।



