Ranchi : देश में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल इन दिनों सोशल मीडिया और सिविल सोसाइटी में चर्चा का विषय बना हुआ है – “जब ₹10 के बिस्किट पर सारी जानकारी लिखना जरूरी है, तो फिर ₹100 करोड़ की सड़क या पुल की जानकारी जनता को क्यों नहीं दी जाती?”
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इस सवाल के पीछे तर्क बिल्कुल स्पष्ट और जनहित से जुड़ा हुआ है। देशभर में रोजाना हजारों किलोमीटर सड़कें और दर्जनों पुल बनते हैं, जिनमें करोड़ों रुपए खर्च होते हैं। लेकिन इन परियोजनाओं की लागत, ठेकेदार का नाम, इंजीनियर और संबंधित अधिकारियों की जानकारी, इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री की मात्रा, सड़क की लंबाई-चौड़ाई और टोल की समय-सीमा जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां आम जनता को नहीं मिलतीं।
जनता का कहना है कि सड़कें और पुल उनके टैक्स के पैसे से बनते हैं, इसलिए उन्हें इस पर पूरा अधिकार है कि वे जानें – यह प्रोजेक्ट कब शुरू हुआ, इसकी डेडलाइन क्या है, इसमें किस कंपनी ने निर्माण किया, टोल टैक्स कितने वर्षों तक लिया जाएगा और उसमें कितनी राशि वसूली जाएगी।
अगर ₹10 के बिस्कुट पर उसकी कीमत, वजन, निर्माता, निर्माण और एक्सपायरी तारीख जैसी जानकारियां देना अनिवार्य है, तो करोड़ों की सार्वजनिक परियोजनाओं में यह पारदर्शिता क्यों नहीं?
इसको लेकर नागरिकों ने सुझाव दिया है कि हर बड़ी निर्माण परियोजना के स्थल पर बड़े-बड़े साइनबोर्ड लगाए जाएं, जिन पर पूरा ब्योरा हो। इसके साथ ही QR कोड भी जोड़ा जाए, जिसे स्कैन कर लोग अपने मोबाइल पर सारी जानकारी पा सकें। इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और जवाबदेही तय होगी।
अब देखना यह है कि सरकार इस सार्वजनिक मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेती है और क्या भविष्य में ऐसी किसी पारदर्शी व्यवस्था की शुरुआत होती है या नहीं।



