Sultanpur: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में स्थित धोपाप धाम, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। गोमती नदी के तट पर बसे इस पावन स्थान की मान्यता है कि यहां भगवान श्रीराम ने रावण वध के बाद अपने पापों से मुक्ति के लिए स्नान किया था। इसीलिए इसे “धोपाप” यानी “पापों को धोने वाला” कहा जाता है।

Also Read : झारखंड में कोरोना की वापसी, रांची-जमशेदपुर में नए केस मिले
गंगा दशहरा जैसे पावन अवसर पर यहां स्नान का विशेष महत्व है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन यहां स्नान करने से व्यक्ति को दस प्रमुख पापों से मुक्ति मिलती है। इनमें तीन कायिक (शारीरिक), चार वाचिक (वाणी के) और तीन मानसिक पाप शामिल हैं।
लम्भुआ तहसील मुख्यालय से मात्र 8 किलोमीटर दूर यह स्थल लखनऊ-वाराणसी राजमार्ग पर स्थित है। यहां स्थित श्रीराम जानकी मंदिर इसकी ऐतिहासिकता को और गहराई देता है। लगभग चार शताब्दी पूर्व ढेमा की रानी स्वरूप कुँवरि द्वारा इस मंदिर का निर्माण कराया गया था। कहा जाता है कि यह मंदिर एक प्राचीन ध्वस्त मंदिर के स्थान पर बना है।
मंदिर लगभग 100 फीट ऊंचे टीले पर स्थित है, जहां से प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की प्रतिमाएं एक साथ विराजमान हैं। साथ ही, राधा-कृष्ण, हनुमान, शिव-पार्वती, दुर्गा, विष्णु, गणेश जैसी अनेक देवी-देवताओं की मूर्तियां भी चारों दिशाओं में बने कक्षों में स्थापित हैं। खास बात यह है कि यहां का शिवलिंग दुर्लभ पत्थर से निर्मित है।
मंदिर की वास्तुकला भी आकर्षक है। यहां बने झरोखे और खिड़कियां गर्मी में भी ठंडी हवा के प्रवाह को बनाए रखती हैं। मंदिर के अंदर का वातावरण शांत और शीतल बना रहता है।
आचार्य पं. रवि शंकर शुक्ल के अनुसार, गंगा दशहरा पर्व ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होकर दशमी तक चलता है। इस वर्ष यह पर्व 28 मई से 5 जून 2025 तक मनाया जा रहा है। 5 जून की सुबह 4:45 बजे वृष लग्न में स्नान का अमृतकाल रहेगा, जो अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।



