- पटना में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। गांधी घाट पर नदी खतरे के निशान से 57 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है, जबकि दीघा और मनेर में पानी लाल निशान के करीब पहुंच गया है।
Patna : बिहार की राजधानी पटना में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और इसका असर अब घाटों से आगे बस्तियों तथा सड़कों के किनारे तक दिखाई देने लगा है। गांधी घाट पर गंगा खतरे के निशान से 57 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। पिछले छह दिनों में यहां जलस्तर करीब दो मीटर बढ़ चुका है।
कुर्जी के पीछे स्थित बिंद टोली में पानी प्रवेश कर गया है, जबकि एलसीटी घाट के पास गंगा का पानी सड़क के किनारे तक पहुंच गया है। पर्यटन घाट समेत लगभग सभी प्रमुख घाटों पर पानी चढ़ गया है, जिससे नदी किनारे रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
गांधी घाट पर छह दिन में करीब दो मीटर बढ़ा पानी
शुक्रवार सुबह छह बजे की रिपोर्ट के अनुसार, गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 49.17 मीटर दर्ज किया गया। यहां खतरे का निशान 48.60 मीटर है। इस तरह गंगा यहां खतरे के निशान से 57 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी।
20 अगस्त को गांधी घाट पर जलस्तर 48.67 मीटर था। यानी 24 घंटे में पानी 50 सेंटीमीटर बढ़ा। वहीं, 15 अगस्त को जलस्तर 47.17 मीटर था। इस तरह छह दिनों में यहां करीब दो मीटर पानी बढ़ चुका है।
दीघा और मनेर में भी खतरे के निशान के करीब गंगा
दीघा घाट पर भी स्थिति तेजी से गंभीर होती जा रही है। शुक्रवार सुबह यहां गंगा का जलस्तर 50.20 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 50.45 मीटर है। यानी नदी का पानी लाल निशान से महज 25 सेंटीमीटर नीचे है।
20 अगस्त को दीघा घाट पर जलस्तर 49.56 मीटर था। इस तरह 24 घंटे में यहां 64 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई। 15 अगस्त को जलस्तर 47.86 मीटर था, जिसके मुकाबले छह दिनों में यहां 2.34 मीटर पानी बढ़ चुका है।
मनेर में गंगा का जलस्तर 51.65 मीटर पहुंच गया है। यहां खतरे का निशान 52 मीटर है, यानी पानी लाल निशान से सिर्फ 35 सेंटीमीटर नीचे है।
वहीं, हाथीदह में जलस्तर 41.88 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 41.76 मीटर है। यहां गंगा खतरे के निशान से 12 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
बढ़ते जलस्तर से निचले इलाकों पर बढ़ा दबाव
गांधी घाट पर गंगा खतरे के निशान से 57 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच चुकी है। यदि जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो निचले शहरी इलाकों पर दबाव बढ़ सकता है।
जलस्तर खतरे के निशान से करीब दो मीटर ऊपर पहुंचने पर शहरी क्षेत्र में भी खतरा बढ़ने की आशंका है। प्रशासन ने फिलहाल शहरी सुरक्षा दीवार, निरीक्षित तटबंधों और अन्य सुरक्षा संरचनाओं को सुरक्षित बताया है।
बाढ़ नियंत्रण विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है। हालांकि, नदी का बढ़ता दबाव निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा रहा है।
छह दिन में गांधी घाट पर दो मीटर बढ़ा जलस्तर
| स्थान | 15 अगस्त | 20 अगस्त | 21 अगस्त | खतरे का निशान |
|---|---|---|---|---|
| गांधी घाट | 47.17 मीटर | 48.67 मीटर | 49.17 मीटर | 48.60 मीटर |
| दीघा घाट | 47.86 मीटर | 49.56 मीटर | 50.20 मीटर | 50.45 मीटर |
| हाथीदह | 40.44 मीटर | 41.51 मीटर | 41.88 मीटर | 41.76 मीटर |
| मनेर | 49.06 मीटर | 50.81 मीटर | 51.65 मीटर | 52.00 मीटर |
उफनाई गंगा देखने घाटों पर उमड़ रही भीड़
जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, प्रयागराज से मुंगेर तक गंगा के अधिकांश प्रमुख गेज स्थलों पर जलस्तर बढ़ रहा है। प्रयागराज में 79.91 मीटर, वाराणसी में 68.70 मीटर और बक्सर में 58.88 मीटर जलस्तर दर्ज किया गया है।
ऊपरी क्षेत्रों में बढ़ते पानी का दबाव पटना में भी गंगा के जलस्तर पर पड़ रहा है। उफनाई गंगा का चौड़ा पाट देखने के लिए जेपी गंगा पथ के दीघा घाट पर लोगों की भीड़ उमड़ रही है। शाम के समय अन्य घाटों पर भी लोग पहुंच रहे हैं।
बढ़ते जलस्तर के कारण जेपी गंगा पथ के नदी किनारे वाले हिस्से में विकास और सुंदरीकरण कार्य प्रभावित हुए हैं। बांसघाट के आसपास वेस्ट टू वंडर पार्क समेत अन्य परियोजनाओं का काम भी रोकना पड़ा है।
219 नाव और नाविक तैयार, एसडीआरएफ की टीमें तैनात
एडीएम आपदा डीपी शाही ने बताया कि बाढ़ से निपटने के लिए 219 नाव और नाविक तैयार हैं। गायघाट और बाढ़ के उमानाथ घाट पर एसडीआरएफ की टीमें मुस्तैद हैं। किसी दुर्घटना की सूचना मिलने पर टीमें तत्काल मौके पर पहुंचेंगी।
उन्होंने नाव से गंगा पार करने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि पंजीकृत नावों पर लाइफ जैकेट पहनकर ही यात्रा करें और ओवरलोड नावों पर कतई सवार न हों।
उन्होंने लोगों से यथासंभव गंगा स्नान से बचने की अपील की। यदि स्नान करना जरूरी हो तो चिह्नित घाटों पर सुरक्षित स्थल तक ही जाएं। तेज बहाव में तैरना भी सुरक्षित नहीं है।
एडीएम आपदा ने कहा कि किसी व्यक्ति के डूबने की स्थिति में उसे बचाने के लिए खुद पानी में कूदने के बजाय तत्काल बचाव दल या आपात सेवा 112 को सूचना दें।



