रामगढ़ सीमेंट फैक्ट्री में टरबाइन ब्लास्ट, 3 इंजीनियरों की मौत और एक गंभीर

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now रामगढ़ के बरकाकाना स्थित मां छिन्नमस्तिका सीमेंट एंड इस्पात फैक्ट्री में टरबाइन ब्लास्ट के बाद पावर प्लांट में आग लग गई। हादसे में तीन इंजीनियरों की मौत हुई, जबकि एक मजदूर गंभीर रूप से घायल

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  • रामगढ़ के बरकाकाना स्थित मां छिन्नमस्तिका सीमेंट एंड इस्पात फैक्ट्री में टरबाइन ब्लास्ट के बाद पावर प्लांट में आग लग गई। हादसे में तीन इंजीनियरों की मौत हुई, जबकि एक मजदूर गंभीर रूप से घायल है।

Ramgarh : झारखंड के रामगढ़ जिले के बरकाकाना स्थित मां छिन्नमस्तिका सीमेंट एंड इस्पात फैक्ट्री में शुक्रवार देर रात बड़ा हादसा हो गया। फैक्ट्री में काम के दौरान अचानक टरबाइन में जोरदार ब्लास्ट हो गया, जिसके बाद पावर प्लांट में भीषण आग लग गई।

हादसे में तीन इंजीनियरों की झुलसने से मौत हो गई, जबकि एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हुआ है। ब्लास्ट इतना तेज था कि हादसे के बाद फैक्ट्री परिसर में देर रात तक अफरा-तफरी का माहौल रहा।

रामगढ़ से पहुंचीं दमकल की कई गाड़ियां

ब्लास्ट और आग की सूचना मिलते ही फैक्ट्री प्रबंधन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और पुलिस को जानकारी दी। इसके बाद रामगढ़ से चार से पांच दमकल वाहनों को घटनास्थल पर भेजा गया।

दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद पावर प्लांट में लगी आग पर काबू पाया।

हादसे में मृत लोगों की पहचान रांची निवासी 50 वर्षीय संजीव कुमार केसरी, बोकारो के जगेश्वर बिहार निवासी 25 वर्षीय विनीत महतो और गढ़वा निवासी 24 वर्षीय अभिषेक पांडेय के रूप में हुई है।

घायल मजदूर तरुण रजवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है।

ग्रामीणों ने मुआवजे और नौकरी की मांग की

शनिवार सुबह बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण फैक्ट्री के बाहर पहुंच गए। ग्रामीणों ने मृत कर्मचारियों के आश्रितों को उचित मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की।

ग्रामीणों के फैक्ट्री गेट जाम करने की तैयारी की सूचना से इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

यूनिट इंचार्ज ने प्रबंधन की लापरवाही का लगाया आरोप

पावर प्लांट यूनिट के इंचार्ज अनुराग त्रिपाठी ने मीडिया के समक्ष हादसे के लिए प्रबंधन की लापरवाही को जिम्मेदार बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्लांट में तापमान बढ़ने और ओवरहीटिंग के कारण हादसा हुआ।

अनुराग त्रिपाठी के अनुसार, तापमान नियंत्रित करने के लिए उन्होंने प्रबंधन से कई बार एसी लगाने का अनुरोध किया था, लेकिन इस दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए।

उन्होंने दावा किया कि समय रहते तापमान नियंत्रण की उचित व्यवस्था की जाती तो हादसे को टाला जा सकता था। हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

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