धार्मिक जुलूस पर प्रतिबंध लगा सकता है प्रशासन? पटना हाईकोर्ट ने साफ की स्थिति

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now पटना हाईकोर्ट ने सिवान के हथौड़ा गांव में महाबीरी जुलूस से जुड़ी याचिका खारिज करते हुए कहा कि धार्मिक जुलूस निकालने का अधिकार संरक्षित है, लेकिन सार्वजनिक शांति, कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य के लिए प्रशासन उचित

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  • पटना हाईकोर्ट ने सिवान के हथौड़ा गांव में महाबीरी जुलूस से जुड़ी याचिका खारिज करते हुए कहा कि धार्मिक जुलूस निकालने का अधिकार संरक्षित है, लेकिन सार्वजनिक शांति, कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य के लिए प्रशासन उचित प्रतिबंध लगा सकता है।

Patna : धार्मिक जुलूस निकालना संविधान के तहत संरक्षित अधिकार है, लेकिन यह अधिकार निरपेक्ष नहीं है। सार्वजनिक शांति, कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्रशासन धार्मिक जुलूस पर उचित प्रतिबंध लगा सकता है।

पटना हाईकोर्ट ने सिवान जिले के हथौड़ा गांव में अखाड़ा नंबर-1 के महाबीरी जुलूस में 300 श्रद्धालुओं को शामिल करने और पारंपरिक मार्ग से जुलूस निकालने की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

न्यायाधीश आलोक कुमार की एकलपीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(बी) और अनुच्छेद 25 के तहत प्राप्त अधिकार उचित प्रतिबंधों के अधीन हैं।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्वतंत्रता लोक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है। धार्मिक जुलूस निकालने का अधिकार संरक्षित है, लेकिन जुलूस किस तरीके से निकलेगा, किस मार्ग से निकलेगा या उसमें कितनी संख्या में लोग शामिल होंगे, इसका हर पहलू स्वतः मौलिक अधिकार का हिस्सा नहीं है।

1958 से निकलता रहा है महाबीरी जुलूस

हथौड़ा गांव के निवासी भदई चौधरी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने कहा था कि अखाड़ा नंबर-1 को वर्ष 1958 से महाबीरी जुलूस निकालने की अनुमति मिलती रही है।

याचिका के अनुसार, वर्ष 2012 और 2013 में 200 श्रद्धालुओं को जुलूस में शामिल होने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद संख्या घटाकर वर्ष 2014 में 150 और वर्ष 2015 में 100 कर दी गई।

वर्ष 2023 से जुलूस में केवल पांच श्रद्धालुओं को शामिल करने की अनुमति दी गई। इसके साथ ही जुलूस के पारंपरिक मार्ग में भी बदलाव किया गया।

याचिकाकर्ता ने 300 लोगों और पुराने मार्ग की मांगी थी अनुमति

याचिकाकर्ता ने पुराने पारंपरिक मार्ग से कम से कम 300 श्रद्धालुओं के साथ महाबीरी जुलूस निकालने की अनुमति देने की मांग की थी।

राज्य सरकार ने इन प्रतिबंधों को कानून-व्यवस्था से जुड़ा निर्णय बताया। सरकार के अनुसार, वर्ष 2015 से 2022 के बीच पांच लोगों की स्वीकृत संख्या के बावजूद जुलूस के दौरान 1700 से 2000 लोगों की भीड़ जुटती रही और कई मामले दर्ज हुए।

सरकार ने वर्ष 2024 की घटना का भी हवाला दिया, जिसमें सरकारी वाहन जलाने और पुलिस पर पथराव का आरोप लगाया गया।

भविष्य में अनुमति की संख्या स्थानीय स्थिति पर होगी तय

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल इस आशंका के आधार पर अभी कोई आदेश नहीं दिया जा सकता कि भविष्य में जुलूस में सिर्फ पांच लोगों को ही शामिल होने की अनुमति मिलेगी।

कोर्ट ने कहा कि जुलूस की अनुमति के समय स्थानीय कानून-व्यवस्था की वास्तविक स्थिति के आधार पर लोगों की संख्या तय की जाएगी।

इन परिस्थितियों को देखते हुए पटना हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

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