Ranchi: कांके प्रखंड अंतर्गत गढ़ हुसीर गांव में आयोजित भव्य जलसा और इस्लाह-ए-मुशायरा की महफिल ने इलाके को रौशन कर दिया। यह आयोजन मस्जिद फातिमा तुज जेहरा के अवसर पर किया गया, जिसमें इस्लामी शिक्षाओं के साथ-साथ उर्दू शायरी की खूबसूरत झलक देखने को मिली।
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रातभर चले इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शरीक हुए। मंच का संचालन बेहद सौहार्दपूर्ण और अनुशासित ढंग से किया गया। मुख्य अतिथि मुफ्ती अब्दुल्लाह सालिम चतुर्वेदी ने इस्लाम को जीवन जीने की पद्धति बताते हुए नैतिकता, इंसाफ और अध्यात्म की अहमियत पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि आज के दौर में इस्लामी शिक्षा को आत्मसात कर समाज को बेहतर बनाया जा सकता है।
शायरी ने बांधा समां
इस जलसे की खास बात रही मशहूर शायर शाबान दिल खैराबादी की शानदार शायरी। उनके कलाम ने महफिल में बैठे लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके अशआरों में समाज, इंसानियत और अल्लाह से मोहब्बत का पैगाम झलकता रहा।
धार्मिक विद्वानों का संदेश
मौलाना उबैदुल्लाह कासमी, अकरम कासमी और अन्य कई धार्मिक विद्वानों ने भी जलसे को संबोधित करते हुए तालीम, तहजीब और इस्लामी मूल्यों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में जागरूकता और सुधार की दिशा में सकारात्मक कदम हैं।
गणमान्य लोग भी रहे मौजूद
इस अवसर पर कांके विधायक सुरेश बैठा, अधिवक्ता जलील अंसारी, पंचायत प्रतिनिधि और अन्य सम्मानित व्यक्ति भी उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन समिति की सराहना की और इस्लामिक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए ऐसे आयोजनों की जरूरत पर बल दिया।
जलसे के अंत में दुआ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। आयोजन ने क्षेत्र में अमन, भाईचारे और तालीमी चेतना का संदेश दिया।



