खारसावां शहीदों को मिलेगा सम्मान, परिवारों की पहचान को बनेगी समिति

Ranchi : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खारसावां गोलीकांड में शहीद हुए आदिवासियों को सम्मान दिलाने की दिशा में बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1948 में पुलिस गोलीबारी में शहीद हुए आदिवासी शहीदों के परिवारों और उनसे जुड़े लोगों की

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दी नव वर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं
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Ranchi : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खारसावां गोलीकांड में शहीद हुए आदिवासियों को सम्मान दिलाने की दिशा में बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1948 में पुलिस गोलीबारी में शहीद हुए आदिवासी शहीदों के परिवारों और उनसे जुड़े लोगों की पहचान के लिए जल्द ही एक समिति का गठन किया जाएगा। पहचान पूरी होने के बाद इन परिवारों को भी गुआ गोलीबारी कांड के शहीदों के परिवारों की तरह सम्मानित किया जाएगा।

गुरुवार को खारसावां शहीद स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी शहीदों का बलिदान झारखंड के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने उन शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की, जिन्होंने सरायकेला-खारसावां जिले के ओडिशा में विलय का विरोध करते हुए और अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

1948 की गोलीबारी में सैकड़ों आदिवासी हुए थे शहीद

मुख्यमंत्री ने बताया कि 1 जनवरी 1948 को नववर्ष के दिन सैकड़ों आदिवासी अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा अलग झारखंड राज्य के गठन की मांग को लेकर खारसावां हाट मैदान में एकत्र हुए थे। इसी दौरान पुलिस ने निहत्थे आदिवासियों पर गोली चला दी, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शहीद हो गए। यह घटना झारखंड के आदिवासी इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक मानी जाती है।

गुआ गोलीकांड के शहीदों जैसा मिलेगा सम्मान

पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदों के परिवारों और उनसे जुड़े लोगों की पहचान के लिए गठित होने वाली समिति जल्द अपना काम शुरू करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि खारसावां के आदिवासी शहीदों के परिवारों को भी ठीक उसी तरह सम्मान और सुविधाएं दी जाएंगी, जैसी 8 सितंबर 1980 को हुए गुआ गोलीबारी कांड के शहीदों के परिवारों को दी गई थीं।

शहीद स्थल को बनाया जाएगा स्मारक

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आदिवासी योद्धाओं ने अपने अधिकारों और अस्मिता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है, जिस पर पूरा आदिवासी समाज गर्व करता है। उन्होंने कहा कि राज्यभर से लोग शहीद स्थल पर आदिवासी नायकों को श्रद्धांजलि देने आते हैं।

शहीद स्थल के साल के अधिकांश समय बंद रहने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसे एक यादगार स्मारक के रूप में विकसित किया जा रहा है। फिलहाल वहां निर्माण कार्य चल रहा है और जल्द ही इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चाहती थी कि इस पवित्र स्थल का किसी भी तरह से दुरुपयोग हो।

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि आदिवासी शहीदों को न तो भुलाया जा सकता है और न ही उनके बलिदान की स्मृति कभी मिट सकती है। आज झारखंड और आदिवासी समाज उन्हीं के संघर्ष और बलिदान के कारण आगे बढ़ पाया है।

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