सरकार का इंतजार छोड़ ग्रामीणों ने उठाया फावड़ा, श्रमदान से सड़क को बनाया चलने लायक

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now कोकदोरो में ग्रामीणों के जज्बे को सलाम: जलजमाव से जर्जर सड़क पर धान रोपकर जताया था विरोध, अब निजी खर्च से हुई मरम्मत मुकेश रंजन Ranchi: कांके प्रखंड के कोकदोरो-मदनपुर गांव के ग्रामीणों ने बदहाल

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  • कोकदोरो में ग्रामीणों के जज्बे को सलाम: जलजमाव से जर्जर सड़क पर धान रोपकर जताया था विरोध, अब निजी खर्च से हुई मरम्मत

मुकेश रंजन

Ranchi: कांके प्रखंड के कोकदोरो-मदनपुर गांव के ग्रामीणों ने बदहाल सड़क के खिलाफ पहले विरोध का रास्ता अपनाया और अब अपने श्रम व सहयोग से समाधान की मिसाल पेश की है। शुक्रवार को जर्जर सड़क पर जलजमाव से परेशान ग्रामीणों ने सड़क पर धान रोपकर जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के प्रति नाराजगी जताई थी। इसके बाद रांची जिला महानगर युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष हाजी नेयाज अंसारी ने सड़क की बदहाली दूर करने का बीड़ा उठाया और निजी खर्च से मरम्मत कार्य शुरू कराया।

सड़क पर मिट्टी-मोरम डालकर बड़े-बड़े गड्ढों को भरा जा रहा है, जिससे फिलहाल लोगों के लिए आवागमन सुगम हो सके। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में सड़क की स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोग प्रतिदिन इसी मार्ग से प्रखंड एवं जिला मुख्यालय, बाजार तथा अन्य जरूरी स्थानों तक आवागमन करते हैं।

वर्षों से उपेक्षा का दंश झेल रही सड़क :

ग्रामीणों के अनुसार, कोकदोरो से बुकरू तक करीब चार किलोमीटर तथा मदनपुर से केलाबगान तक करीब दो किलोमीटर सड़क वर्षों से बदहाली का शिकार है। मदनपुर-केलाबगान मार्ग आगे रांची-पतरातू मुख्य मार्ग से जुड़ता है। बारिश होते ही सड़क पर जगह-जगह पानी भर जाता है और बड़े-बड़े गड्ढे दुर्घटना का खतरा बढ़ा देते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण और मरम्मत के लिए कई बार संबंधित विभाग के अधिकारियों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों को जानकारी दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। मजबूर होकर ग्रामीण कई बार श्रमदान कर सड़क को किसी तरह चलने लायक बनाते रहे हैं।

विकास का पहला पैमाना सड़क:

ग्रामीणों ने कहा कि किसी भी क्षेत्र के विकास का सबसे पहला पैमाना वहां की सड़क और आवागमन की सुविधा होती है। एक ओर सरकार आधारभूत संरचना और सड़क निर्माण पर हर वर्ष बड़ी धनराशि खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर गांवों की छोटी लेकिन महत्वपूर्ण सड़कें वर्षों से उपेक्षित पड़ी हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि अस्थायी मरम्मत के बजाय कोकदोरो-बुकरू और मदनपुर-केलाबगान सड़क का स्थायी निर्माण कराया जाए, ताकि बरसात में हर साल होने वाली परेशानी से ग्रामीणों को हमेशा के लिए निजात मिल सके।

ग्रामीणों का श्रमदान और हाजी नेयाज अंसारी की पहल फिलहाल राहत जरूर दे रही है, लेकिन ग्रामीणों की नजर अब स्थायी सड़क निर्माण पर टिकी है।

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