कनाडा में मोहन भागवत का संदेश, भारत की संस्कृति में है विश्व कल्याण

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कनाडा में भारत की मूल संस्कृति, वसुधैव कुटुंबकम और विश्व कल्याण पर बात की। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा एकता सिखाती है। टोरंटो (कनाडा): राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के

कनाडा में मोहन भागवत का संदेश, भारत की संस्कृति में है विश्व कल्याण
WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
  • आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कनाडा में भारत की मूल संस्कृति, वसुधैव कुटुंबकम और विश्व कल्याण पर बात की। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा एकता सिखाती है।

टोरंटो (कनाडा): राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि भारत की मूल संस्कृति दुनिया की मदद करने और उसकी एकता में निहित है। भारतीय परंपरा विविधता को एकता के स्वाभाविक स्वरूप के रूप में देखती है।

उन्होंने यह बात टोरंटो में आयोजित “हिंदू विश्व बंधु-दोस्ती में दुनिया को अपनाएं” कार्यक्रम में कही। ‘कैनेडियन हिंदूज फॉर आउटरीच, रिलेशंस एंड डायलॉग’ की ओर से आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ हुई।

भारत की परंपरा दुनिया की मदद करने की

डॉ. भागवत ने भारतीय परंपरा में परोपकार के महत्व पर बात करते हुए कहा कि जब भी दुनिया में कहीं से भारत से मदद मांगी गई, भारत ने कभी मना नहीं किया। उन्होंने कहा कि कई बार भारत ने बिना मांगे भी मदद का हाथ बढ़ाया है।

उन्होंने कहा, “यही हमारी परंपरा है। यही भारत का डीएनए है। इसीलिए आपने यह कहावत सुनी होगी- अगर हिन्दू जागते हैं, तो दुनिया जागती है।”

डॉ. भागवत ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक विरासत मानवता और प्रकृति के बीच एकता को बढ़ावा देती है।

विविधता को एकता का स्वरूप मानती है भारतीय परंपरा

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारतीय परंपरा सजीव और निर्जीव दोनों को अपना मानती है। लोगों को विविधता में एकता देखने की सीख दी गई है।

उन्होंने कहा, “भारत में विविधता कभी भी एकता के लिए समस्या नहीं बनती। हमारी परंपरा हमें सिखाती है कि न केवल विविधता में एकता है, बल्कि विविधता खुद एकता का एक रूप है।”

उन्होंने वैश्विक समुदाय से वसुधैव कुटुंबकम की प्राचीन विचारधारा को अपनाने का आह्वान किया।

सेवा को बताया मानवता का कर्तव्य

डॉ. भागवत ने कहा कि असली ज्ञान बाहरी अंतर से आगे जाकर मानवता की आध्यात्मिक एकता को पहचानने में है। उनके मुताबिक खुले विचारों वाले और चिंतनशील लोग वसुधैव कुटुंबकम की भावना को अपनाते हैं और पूरी धरती को एक परिवार मानते हैं।

उन्होंने कहा कि भौतिक दुनिया में लोग शरीर, आकार और रंग-रूप में अलग हो सकते हैं, लेकिन वास्तव में सभी एक हैं। इसलिए दूसरों की सेवा करना हमारा कर्तव्य है और यह ज्ञान हमेशा खुशी और संतुष्टि देता है।

भारत महाशक्ति नहीं, अपने चरित्र से बना विश्वगुरु

सरसंघचालक ने भारत के विश्वगुरु बनने की बात करते हुए कहा कि भारत अपने स्वभाव और चरित्र के कारण विश्वगुरु बना, महाशक्ति बनने के कारण नहीं।

उन्होंने कहा, “कोई भी उस समय भारत को महाशक्ति कह देता, लेकिन वह महाशक्ति नहीं था। उसने दुनिया की सेवा की। अपने चरित्र के कारण वह विश्वगुरु बना, महाशक्ति नहीं। इसलिए भारत के उदय का मतलब है ज्यादा एकजुट और अधिक मानवता।”

पूर्वजों ने दुनिया को दिया ज्ञान और सभ्यता का संदेश

डॉ. भागवत ने कहा कि भारत के पूर्वजों का लक्ष्य दुनिया को ज्ञान और सभ्यता के मूल्य सिखाना था। उन्होंने कहा कि उस समय सड़कें, नावें, हवाई जहाज या मोटर गाड़ियां नहीं थीं। परिवहन के साधनों में बैलगाड़ियां और घोड़े प्रमुख थे।

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद भारत के पूर्वज मेक्सिको से साइबेरिया तक गए। वे पैदल हिमालय पार कर चीन, साइबेरिया और मंगोलिया गए, जबकि छोटी नावों के जरिए दक्षिण-पूर्व एशिया तक पहुंचे।

डॉ. भागवत ने कहा कि उन्होंने किसी देश पर कब्जा नहीं किया और न ही किसी का धर्म बदला। वे जहां भी गए, वहां ज्ञान दिया। उन्होंने ज्योतिष और आयुर्वेद की जानकारी दी तथा सभ्यता के मूल्य सिखाए।

जेसन केनी ने भारत-कनाडा संबंधों पर कही बात

कार्यक्रम में डॉ. मोहन भागवत के साथ कनाडा के पूर्व रक्षामंत्री और अल्बर्टा के पूर्व प्रीमियर जेसन केनी ने भी मंच साझा किया। केनी ने दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में बढ़ती गति की सराहना की।

उन्होंने कहा, “कनाडा-भारत संबंधों में नई गति देखना बहुत अच्छा लग रहा है। इसे इस वर्ष के आखिर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कनाडा की दूसरी यात्रा से महसूस किया जा सकेगा।”

टोरंटो पहुंचने पर हुआ स्वागत

इससे पहले टोरंटो पहुंचने पर संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत का स्वागत किया गया। पूरे कनाडा से हिंदू समुदाय के लोग उनका स्वागत करने पहुंचे।

स्वागत करने वालों ने उनकी यात्रा को शांति, सांस्कृतिक मूल्यों और वैश्विक सद्भाव को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम पल बताया।

रॉयल कैनेडियन एयर फोर्स के पूर्व अधिकारी कार्तिक त्रिवेदी ने कहा कि उन्होंने अपनी हिंदू पहचान पर गर्व करते हुए 15 साल तक कनाडा की सेवा की है।

वहीं, ग्रेटर टोरंटो एरिया हिंदू सभा मंदिर के राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि संघ प्रमुख भागवत की यात्रा वसुधैव कुटुंबकम का संदेश देती है।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram
संबंधित खबरें.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अभी-अभी.