Patna : बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की तैयारियों के बीच राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक संगठनात्मक फैसला नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया को लेकर बढ़ते असंतोष का संकेत भी हो सकता है।
करीब एक दशक से राजद का प्रमुख चेहरा रहे मृत्युंजय तिवारी ने मीडिया और राजनीतिक मंचों पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा। इस्तीफा देते हुए उन्होंने कहा कि लंबे समय से उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिला और काफी सोच-विचार के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि फिलहाल इस्तीफा वापस लेने का कोई सवाल नहीं है।
तिवारी के बयान के बाद पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान एक बार फिर चर्चा में आ गई है। पिछले कुछ समय से तेज प्रताप यादव और रोहिणी आचार्य भी संगठन के भीतर कुछ नेताओं की भूमिका को लेकर सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाते रहे हैं। अब मृत्युंजय तिवारी की नाराजगी ने इन चर्चाओं को और बल दिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजद में पुराने और संगठन से जुड़े नेताओं तथा नई नेतृत्व टीम के बीच मतभेद बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, यह विश्लेषण है और इसकी आधिकारिक पुष्टि पार्टी की ओर से नहीं की गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने तिवारी से बातचीत कर मामले को सुलझाने की कोशिश की है और उन्हें लालू प्रसाद यादव से मिलकर अपनी बात रखने की सलाह दी है।
इस्तीफे का समय भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव सिर पर है। ऐसे समय में पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता का पद छोड़ना विपक्ष को राजद पर हमला करने का अवसर दे सकता है। साथ ही, राजद की ‘A to Z’ सामाजिक समीकरण की रणनीति पर भी इसका असर पड़ने की चर्चा हो रही है।
फिलहाल राजद नेतृत्व की ओर से इस मुद्दे पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी इस असंतोष को दूर करने के लिए क्या कदम उठाती है और क्या मृत्युंजय तिवारी को मनाने की कोशिश सफल होती है या नहीं।



