पश्चिमी सिंहभूम। झारखंड के नक्सल प्रभावित सारंडा जंगल में सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन के दौरान दो शक्तिशाली इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) बरामद किए हैं। गुरुवार, 29 अक्टूबर को छोटानागरा थाना क्षेत्र के बहदा गांव के समीप कोयना नदी के किनारे जमीन में छिपाकर रखे गए इन विस्फोटकों को शुक्रवार को सुरक्षा बलों ने निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया के तहत निष्क्रिय कर दिया। समय रहते विस्फोटकों की बरामदगी से संभावित बड़ा हादसा टल गया।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई सीआरपीएफ की 193वीं बटालियन और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम ने की। अभियान में छोटानागरा थाना प्रभारी गौतम कुमार और पुलिस के जवान भी शामिल थे।
पगडंडी के पास जमीन में छिपाए गए थे IED
दोनों शक्तिशाली आईईडी लैंडमाइन बहदा गांव के पास कोयना नदी किनारे पगडंडी रास्ते के ऊंचे हिस्से में जमीन के भीतर छिपाकर रखे गए थे। प्रारंभिक जांच के अनुसार, आशंका है कि इन्हें सुरक्षा बलों की आवाजाही के दौरान नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से लगाया गया था।
संयुक्त अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने विस्फोटकों की पहचान की और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए उन्हें निष्क्रिय कर दिया। इस कार्रवाई से सुरक्षा बलों के साथ-साथ आसपास के ग्रामीणों और क्षेत्र से गुजरने वाले लोगों के लिए संभावित खतरा भी टल गया।
मुठभेड़ स्थल से डेढ़-दो किलोमीटर दूर मिले विस्फोटक
गौरतलब है कि जिस स्थान से दोनों आईईडी बरामद किए गए, उससे करीब डेढ़ से दो किलोमीटर की दूरी पर कुछ महीने पहले सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई थी।
उस मुठभेड़ में एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली अनल दा और 50 लाख रुपये के इनामी अनमोल दा समेत 17 नक्सली मारे गए थे। उस कार्रवाई के बाद इलाके में नक्सली गतिविधियों को बड़ा झटका लगा था।
नक्सली गतिविधियां कमजोर, लेकिन पुराने विस्फोटक अब भी खतरा
सारंडा जंगल में नक्सली गतिविधियां कमजोर पड़ने के बावजूद पहले से लगाए गए विस्फोटक सुरक्षा बलों और स्थानीय ग्रामीणों के लिए खतरा बने हुए हैं। जंगल में आवाजाही करने वाले ग्रामीणों के अलावा वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है।
सुरक्षा बलों की ओर से क्षेत्र में लगातार तलाशी और एंटी-नक्सल अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि जंगल में छिपाए गए अन्य विस्फोटकों का पता लगाया जा सके और संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सके।



