मोसाद-अदाणी के गुप्त मिशन ने हिला दी नेट एंडरसन की नींव
New Delhi/ New York : जब दुनिया के कुछ खास खुफिया गलियारों में “ऑपरेशन ज़ेपेलिन” की चर्चा शुरू हुई, तभी न्यूयॉर्क के इनवुड स्थित अपने ऑफिस में हिंडनबर्ग रिसर्च के संस्थापक नाथन ‘नेट’ एंडरसन बुरी तरह परेशान दिखा। अदाणी ग्रुप को निशाना बनाने वाली उसकी रिपोर्ट अब खुद जांच के घेरे में आ चुकी थी — और वो भी एक बहुपरत, वैश्विक खुफिया मिशन के जरिए! नेट एंडरसन, जो अब तक खुद को “ट्रुथ हंटर” कहता था, भारतीय मीडिया के बदलते रवैये से झल्ला गया। उसने कहा, “इंडियन मीडिया एकतरफा बकवास फैला रहा है। ये पत्रकारिता नहीं, राष्ट्र-प्रायोजित प्रतिशोध है।” लेकिन भारतीय मीडिया अब सिर्फ रिपोर्ट नहीं पढ़ रहा था, वो हिंडनबर्ग की पृष्ठभूमि, फंडिंग, नेटवर्क और आशयों को भी खंगाल रहा था। कई चैनलों और पत्रकारों ने इसे सीधा एक “फाइनेंशियल टेरर अटैक” तक कह डाला।

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क्या है ऑपरेशन ज़ेपेलिन?
जनवरी 2023 में जब हिंडनबर्ग रिपोर्ट आई, तो उसने अदाणी ग्रुप पर बड़े वित्तीय आरोप लगाए। लेकिन जो दुनिया ने नहीं देखा — वो था एक गुप्त जवाबी मिशन: ऑपरेशन ज़ेपेलिन। शुरुआत हुई अदाणी इंटेलिजेंस विंग से, जिसने रिपोर्ट में छिपे संकेतों को डीकोड करना शुरू किया। डिजिटल ट्रेल्स, संदिग्ध ईमेल्स और शेल कंपनियों ने एक वैश्विक साज़िश की ओर इशारा किया। यहीं से जुड़ गई इज़रायली खुफिया एजेंसी मोसाद। अदाणी के इज़रायली निवेशों और वैश्विक संबंधों को देखते हुए मोसाद ने इस ऑपरेशन में रुचि ली। वहीं, भारत में अदाणी की मीडिया सेल ने जमीनी प्रोजेक्ट्स की सच्चाई, पॉजिटिव नैरेटिव और लोकल इन्वेस्टर अपील को मज़बूत किया।
नेट एंडरसन की झुंझलाहट इस बात की गवाही है कि ऑपरेशन ज़ेपेलिन अपना असर दिखा रहा है। एंडरसन की एक बंद मीटिंग में दी गई धमकी — “ये सिर्फ शुरुआत है” — अब शायद खुद उसी के लिए चेतावनी बनती जा रही है। ऑपरेशन ज़ेपेलिन, भारत के कॉरपोरेट इतिहास का सबसे साहसी खुफिया मिशन बन गया है — जहां कारोबारी जंग को खुफिया हथियारों और साइबर ताकत से लड़ा गया, और भारत की एक कंपनी ने वैश्विक मंच पर अपना लोहा फिर से मनवाया।



