पटना/खगड़िया: बिहार के खगड़िया में बाढ़ के कारण कई इलाकों का सड़क संपर्क प्रभावित है। चारों ओर पानी होने की वजह से लोगों के लिए अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। ऐसे समय में जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए नाव को ही चलता-फिरता क्लिनिक बना दिया है। फ्लोटिंग क्लिनिक और बोट एंबुलेंस के जरिए बाढ़ प्रभावित इलाकों में मरीजों का इलाज किया जा रहा है। खगड़िया के जिला पदाधिकारी विक्रम विरकर की पहल पर शुरू की गई इस व्यवस्था के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम नाव से प्रभावित इलाकों में पहुंच रही है। नाव पर मरीजों की जांच की जा रही है और उन्हें जरूरी दवाइयां भी दी जा रही हैं। डॉक्टरों की ओर से स्वास्थ्य संबंधी सलाह के साथ जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर विशेष ध्यान
बाढ़ के दौरान गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी न हो, इसके लिए विशेष व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य टीम इन वर्गों की जरूरतों पर खास ध्यान दे रही है। इसके अलावा सर्पदंश, डूबने की घटनाओं और बाढ़ के बाद होने वाली जलजनित तथा मच्छर जनित बीमारियों से जुड़े मरीजों को भी इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।
1300 से ज्यादा मरीजों का इलाज
प्रशासन के अनुसार, फ्लोटिंग क्लिनिक के माध्यम से अब तक 1300 से अधिक लोगों का इलाज किया जा चुका है। बाढ़ के कारण जिन गांवों तक सड़क के रास्ते पहुंचना मुश्किल है, वहां नाव के जरिए स्वास्थ्यकर्मी पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य टीम ग्रामीणों की नि:शुल्क जांच कर रही है। जांच के बाद जरूरत के अनुसार दवाइयां दी जा रही हैं। आपात स्थिति में चिकित्सा सहायता और जरूरी परामर्श भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
अगुवानी घाट में भी सुविधा
खगड़िया के अगुवानी घाट, परबत्ता में भी फ्लोटिंग क्लिनिक की व्यवस्था की गई है। जिला प्रशासन ने श्रावणी मेला और बाढ़ की स्थिति को ध्यान में रखते हुए इसे तैयार कराया था। अब बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए यह सुविधा काफी उपयोगी साबित हो रही है। जिला पदाधिकारी विक्रम विरकर ने बताया कि अगुवानी घाट में फ्लोटिंग क्लिनिक की व्यवस्था की गई है। इसका लाभ अब तक एक हजार से अधिक लोग ले चुके हैं।
लोगों को अस्पताल जाने की जरूरत कम हुई
बाढ़ के दौरान सड़कें डूबने के कारण मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में काफी परेशानी होती है। ऐसे में नाव के जरिए डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के लोगों तक पहुंचने से बड़ी राहत मिल रही है। खासकर ऐसे मरीज जिन्हें तत्काल जांच या दवा की जरूरत होती है, उन्हें स्थानीय स्तर पर ही मदद मिल रही है।
सुनिए आम जनता की आवाज
“बहुत ही सुंदर पहल है। मैं पहली बार देखी हूं। ऐसे समय में सरकार अगर हम लोगों की मदद करती है तो काफी आसान हो जाता है।”

तेमथा, खगड़िया
“बाढ़ की मुश्किल घड़ी में स्वास्थ्य सुविधा का इस तरह लोगों तक पहुंचाना प्रभावित परिवारों के लिए बड़ी राहत है। इलाज के लिए लंबी दूरी तय करने की मजबूरी कम हो रही है और जरूरतमंदों को पानी के बीच ही स्वास्थ्य सहायता मिल रही है।”

“बाढ़ के समय आने-जाने में काफी परेशानी होती है। ऐसे में जब डॉक्टर और इलाज की सुविधा नाव के जरिए हमारे पास पहुंचती है, तो काफी राहत मिलती है। समय पर जांच और इलाज हो जाता है।”



