Ranchi: कांके विधानसभा में इन दिनों सियासी पारा चढ़ा हुआ है। विकास कार्यों को लेकर भाजपा के पूर्व विधायक समरीलाल और वर्तमान कांग्रेस विधायक सुरेश कुमार बैठा आमने-सामने हैं। दोनों नेता एक-दूसरे पर तीखे आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं और स्वयं को क्षेत्र के विकास का असली शिल्पकार बता रहे हैं।
समरीलाल का दावा – भाजपा ने रखी नींव
पूर्व विधायक समरीलाल ने दावा किया कि कांके में सड़कों, विद्यालयों और स्वास्थ्य उपकेंद्रों जैसी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं उनके कार्यकाल में स्वीकृत हुईं। उन्होंने कहा कि 1990 के बाद भाजपा शासन में कांके को ‘टापूनुमा’ हालात से बाहर निकाला गया। उन्होंने 11 बड़े पुलों के निर्माण, स्मारक, विश्वविद्यालय पदों की बहाली और केंद्रीय विश्वविद्यालय की मांग को अपनी प्रमुख उपलब्धियों में गिनाया।
सुरेश बैठा का पलटवार – नींव नहीं, इमारत हमने बनाई
वर्तमान विधायक सुरेश बैठा ने समरीलाल के दावों को खारिज करते हुए कहा कि पूर्व विधायक सिर्फ कागज़ी योजनाओं तक सीमित रहे, जबकि उन्होंने योजनाओं को धरातल पर उतारा। उन्होंने भाजपा पर कमीशनखोरी की राजनीति का आरोप लगाया और कहा कि पहले चापाकल और सोलर लाइट जैसी योजनाएं भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाया करती थीं।
हेमंत सरकार की मदद से विकास को मिली रफ्तार
सुरेश बैठा ने झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार को धन्यवाद देते हुए बताया कि 88 करोड़ रुपये की अटकी हुई राशि को स्वीकृत करवाकर क्षेत्र के विकास कार्यों को गति दी गई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “बीज बोने का श्रेय लेने से खेत नहीं लहलहाते।”
राजनीतिक विश्लेषण और जनता की भूमिका
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह श्रेय विवाद 2025 के विधानसभा चुनावों की नींव बन सकता है। जनता के बीच यह सवाल गूंज रहा है कि कांके के विकास का असली सूत्रधार कौन है – समरीलाल या सुरेश बैठा? अब फैसला लोकतंत्र की अदालत, यानी जनता करेगी।






