New Delhi : मद्रास हाईकोर्ट की जज जस्टिस जे. निशा बानो के केरल हाईकोर्ट ट्रांसफर को लेकर मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि जस्टिस बानो को 20 दिसंबर 2025 तक केरल हाईकोर्ट में पदभार ग्रहण करना होगा। यह निर्देश भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद जारी किया गया है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर 2025 को जस्टिस जे. निशा बानो के मद्रास हाईकोर्ट से केरल हाईकोर्ट ट्रांसफर की अधिसूचना जारी की थी। हालांकि लगभग दो महीने बीत जाने के बावजूद उन्होंने केरल हाईकोर्ट में कार्यभार नहीं संभाला, जिससे केरल हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के बीच असंतोष देखने को मिला।
इस देरी को लेकर जस्टिस बानो ने पहले सफाई देते हुए कहा था कि उन्होंने अपने पुत्र के विवाह के कारण अर्जित अवकाश के लिए आवेदन किया था और साथ ही ट्रांसफर पर पुनर्विचार याचिका के परिणाम की प्रतीक्षा कर रही थीं।
मामले को राजनीतिक रंग भी मिला, जब कांग्रेस सांसद के.एम. सुधा आर ने लोकसभा में सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या जस्टिस बानो अब भी मद्रास हाईकोर्ट कॉलेजियम का हिस्सा हैं और क्या उन्होंने नियुक्तियों से जुड़ी किसी सिफारिश पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस पर केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान के अनुच्छेद 217 का हवाला देते हुए कहा कि किसी न्यायाधीश का ट्रांसफर होते ही उसका वर्तमान पद स्वतः रिक्त माना जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 14 अक्टूबर 2025 को जारी अधिसूचना के बाद जस्टिस बानो का मद्रास हाईकोर्ट में पद बना रहना संवैधानिक रूप से संभव नहीं है।
अब राष्ट्रपति के निर्देश के बाद यह साफ हो गया है कि जस्टिस जे. निशा बानो को तय समय-सीमा के भीतर केरल हाईकोर्ट में पदभार संभालना होगा।

