23 लोगों की हत्या के मामले में हाई कोर्ट के फैसले पर उठा सवाल

Kathmandu : नेपाल की राजनीति और न्यायपालिका में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 23 लोगों को जिंदा जलाकर हत्या करने के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता आफताब आलम सहित पांच लोगों को रिहा करने वाले हाई

23 लोगों की हत्या के मामले में हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल
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Kathmandu : नेपाल की राजनीति और न्यायपालिका में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 23 लोगों को जिंदा जलाकर हत्या करने के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता आफताब आलम सहित पांच लोगों को रिहा करने वाले हाई कोर्ट के दो जजों और कानून मंत्री अजय चौरसिया के खिलाफ अब जांच की मांग की गई है। इस पूरे मामले में न्याय परिषद ने आपातकालीन बैठक भी बुलाई है।

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यह मामला 2008 के चुनावों के दौरान का है, जब रौतहट जिले में बम बनाते समय हुए विस्फोट में घायल हुए मजदूरों को ईंट भट्ठे में जिंदा जला दिया गया था। इस हृदयविदारक घटना में आफताब आलम को मुख्य आरोपी बनाया गया था और रौतहट जिला अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। लेकिन पिछले हफ्ते जनकपुर हाई कोर्ट की बीरगंज पीठ ने सबूतों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया।

हाई कोर्ट के जज डॉ. खुशी प्रसाद थारू और अर्जुन महर्जन की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। लेकिन अब यह फैसला राजनीतिक दबाव में लिया गया बताया जा रहा है। नेपाल बार एसोसिएशन ने न्याय परिषद में हाई कोर्ट के दोनों जजों और पूर्व कानून मंत्री अजय चौरसिया के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

इस शिकायत में कहा गया है कि यह फैसला निष्पक्ष नहीं था और इसमें सत्तारूढ़ नेपाली कांग्रेस के दबाव की आशंका है। उल्लेखनीय है कि फैसले से एक दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउवा ने सार्वजनिक रूप से आफताब आलम की जेल से जल्द रिहाई की बात कही थी।

नेपाल बार एसोसिएशन ने हाई कोर्ट जजों और कानून मंत्री के फोन कॉल डिटेल्स की जांच की मांग की है, विशेषकर फैसले के दो दिन पहले से लेकर दो दिन बाद तक की अवधि की।

अब इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए न्याय परिषद की बैठक बुधवार शाम बुलाई गई है, जिसमें आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले का स्वतः संज्ञान लिया है और स्पष्ट सबूतों के आधार पर फिर से गिरफ्तारी व मुकदमे का आदेश दिया है।

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