Ranchi : झारखंड की राजधानी के कांके प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में स्थित राष्ट्रीय ध्वज स्तंभ बीते एक महीने से टूटकर जमीन पर पड़ा है, लेकिन अब तक न प्रशासन चेता, न ही जनप्रतिनिधियों ने सुध ली। इस चौंकाने वाली उपेक्षा ने प्रशासन की संवेदनहीनता और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया है।
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स्थानीय नागरिकों द्वारा खींची गई तस्वीरें साफ तौर पर दिखाती हैं कि तिरंगे का मंच उजड़ा पड़ा है, ध्वज स्तंभ बेजान होकर ज़मीन पर गिरा है, और चारों ओर की सुरक्षा चेनें भी अस्त-व्यस्त हैं।
प्रशासनिक लापरवाही की बेजोड़ तस्वीर:
यह सिर्फ एक लोहे का खंभा नहीं, यह भारत की अस्मिता, गर्व और चेतना का प्रतीक है। जब ऐसा गौरवशाली स्थल इस तरह उपेक्षित हो, तो यह सिर्फ बदहाली नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता है।
जनता पूछ रही है – क्या हर घर तिरंगा बस एक इवेंट था :
एक माह बीतने के बाद भी मरम्मत न होना किसकी जिम्मेदारी है? क्या प्रतीकों की टूट-फूट से ज़्यादा डर है आलोचना से? कांके जैसे प्रमुख सरकारी परिसर में ऐसी उपेक्षा क्या राष्ट्रगौरव के साथ अन्याय नहीं है?
स्थानीय आवाज़ें उठने लगी हैं:
तिरंगा तो हर घर लहराया, लेकिन जहां उसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी वहां वह जमीन पर गिरा पड़ा है। इससे बड़ा अपमान और क्या होगा?
यह टूटा खंभा नहीं, टूटी हुई व्यवस्था और गिरी हुई संवेदना का प्रतीक बन गया है।
ध्वज स्तंभ की मरम्मत सिर्फ निर्माण कार्य नहीं, यह राष्ट्र के प्रति निष्ठा का संकल्प है। कांके प्रशासन इस मुद्दे को प्राथमिकता दे। दोषियों की जवाबदेही तय हो और राष्ट्रगौरव के इस प्रतीक को तत्काल पुनः स्थापित किया जाए।



