झारखंड में राशन कार्ड घोटाला: अमीर उठा रहे थे गरीबों का हक

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now मुकेश रंजन Ranchi : झारखंड में एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है, जहाँ लाखों रुपये के टर्नओवर वाले कारोबारी, होटल मालिक, गोदाम संचालक और खनन व्यवसायी वर्षों से गरीबों का राशन हड़पते आ रहे

झारखंड में अमीरों की गरीबी का घोटाला उजागर , अपात्रों ने लूटा गरीबों का हक, प्रशासन सख्त
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मुकेश रंजन

Ranchi : झारखंड में एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है, जहाँ लाखों रुपये के टर्नओवर वाले कारोबारी, होटल मालिक, गोदाम संचालक और खनन व्यवसायी वर्षों से गरीबों का राशन हड़पते आ रहे थे। ये वे लोग हैं, जो कारों में घूमते हैं, आलीशान घरों में रहते हैं, और हर माह सरकारी योजनाओं के अंतर्गत मिलने वाला मुफ्त चावल व अन्य खाद्यान्न उठा रहे थे । वह भी लाल व पीले राशन कार्ड के ज़रिए।

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यह फर्जीवाड़ा तब सामने आया जब राशन कार्डों को आधार से लिंक किया गया और लाभुकों की पारिवारिक आय की सच्चाई सामने आई। इससे प्रशासन भी हतप्रभ रह गया।

घोटाले की प्रमुख झलकियां:

हजारों अपात्रों की पहचान:
राज्य के कई जिलों में अब तक ऐसे हजारों परिवार सामने आए हैं, जो अमीर हैं, फिर भी सरकारी राशन योजनाओं का अनुचित लाभ उठा रहे थे।

राशन पर डाका डालने वाले कौन?:
इस सूची में होटल मालिक, गोदाम संचालक, खनन क्षेत्र से जुड़े प्रभावशाली व्यक्ति और व्यापारी वर्ग शामिल हैं, जिनका सालाना टर्नओवर 10 से 25 लाख तक है।

लाल-पीला कार्ड से मुफ्त राशन:
ये अपात्र लोग हर माह मुफ्त चावल, दाल, नमक और अन्य खाद्य सामग्री उठाते रहे, जबकि असली जरूरतमंद खाली हाथ रह जाते रहे।

प्रशासन की कार्रवाई तेज:

प्रशासन ने अपात्रों के राशन कार्ड रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। खाद्य आपूर्ति विभाग ने स्पष्ट किया है कि जो लोग गलत तरीके से सरकारी लाभ उठा रहे हैं, उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई भी संभव है। e-KYC और आधार लिंकिंग के नए नियमों के तहत ऐसे लाभुकों की पहचान की जा रही है और उन्हें सूची से हटाया जा रहा है।

गरीबों को मिलेगा उनका हक:
सरकार अब इस पूरे तंत्र को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। e-KYC और डिजिटल सत्यापन के चलते अपात्रों की पहचान आसान हो रही है और योग्य लाभुकों तक योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा रहा है।

यह घोटाला न केवल गरीबों के हक पर हमला है, बल्कि व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न है। अब जब प्रशासन जाग चुका है, तो उम्मीद है कि ऐसे सभी अपात्र लाभुकों पर सख्त कार्रवाई होगी और गरीबों के अधिकार की रक्षा सुनिश्चित होगी।

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