बिना NOC, जमीन-भवन और स्टाफ के चल रहे थे D.Pharm संस्थान
Ranchi : झारखंड में डिप्लोमा इन फार्मेसी (D.Pharm) पाठ्यक्रम संचालित कर रहे 34 फार्मेसी कॉलेजों की मान्यता रद्द करने की तैयारी है। विभागीय प्रावधानों का खुलेआम उल्लंघन करने वाले इन संस्थानों ने न तो सरकार से NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लिया और न ही इसके लिए आवेदन किया। गंभीर बात यह है कि इन कॉलेजों के पास न अपनी जमीन है, न भवन और न ही टीचिंग व नन-टीचिंग स्टाफ।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन 34 संस्थानों को दिया गया लेटर ऑफ कंसेंट (Letter of Consent) अब निरस्त किया जाएगा।
🔹 36 अन्य संस्थानों से मांगा गया स्पष्टीकरण
जांच में यह भी सामने आया है कि 36 अन्य फार्मेसी संस्थान ऐसे हैं, जिनके पास अपनी जमीन और भवन तो हैं, लेकिन टीचिंग और नन-टीचिंग स्टाफ की आंशिक कमी पाई गई है।
इन संस्थानों ने भी D.Pharm कोर्स के लिए न तो NOC ली है और न ही आवेदन किया है। स्वास्थ्य विभाग ने इन सभी 36 कॉलेजों से स्पष्टीकरण मांगा है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
🔹 PCI के मानकों की अनदेखी पर सवाल
इस पूरे मामले में यह सवाल भी उठा है कि Pharmacy Council of India (PCI) के तय मानकों के अनुसार
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शिक्षकों
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भवन
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लैब और अन्य संसाधनों
की जांच परीक्षा समिति द्वारा समय पर क्यों नहीं की गई। इस लापरवाही को लेकर डिप्लोमा इन फार्मेसी एग्जामिनेशन कमेटी के अध्यक्ष/सदस्य सचिव से भी स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
🔹 विभागीय जांच में हुआ बड़ा खुलासा
अनियमितताओं की शिकायतों के बाद Jharkhand Health Department के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के निर्देश पर अगस्त में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी।
उप सचिव रंजीत लोहरा की अध्यक्षता वाली इस समिति में
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अवर सचिव धीरंजन प्रसाद शर्मा
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प्रशांत पांडेय
शामिल थे। समिति ने राज्य के कुल 71 फार्मेसी संस्थानों की जांच की, जिसमें व्यापक अनियमितताएं सामने आईं। जांच रिपोर्ट विभाग को सौंप दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार कई संस्थान
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सरकारी नियमों का पालन नहीं कर रहे
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और न ही PCI के मानकों पर खरे उतरते हैं
🔹 छात्रों के भविष्य पर मंडराया संकट
मान्यता रद्द होने की स्थिति में इन फार्मेसी कॉलेजों में पढ़ रहे छात्रों के भविष्य पर संकट खड़ा हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे का निर्णय लिया जाएगा।

