Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची स्थित रिम्स की जमीन पर हुए अवैध कब्जे और अतिक्रमण मामले में बड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है। झारखंड एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने सोमवार को रांची ब्रांच में प्राथमिकी दर्ज कर इस बहुचर्चित घोटाले की जांच शुरू कर दी है।
यह कार्रवाई झारखंड हाई कोर्ट के सख्त निर्देश के बाद की गई है। अदालत ने न सिर्फ अवैध अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए हैं, बल्कि इस पूरे मामले में संलिप्त दोषी अधिकारियों के खिलाफ एसीबी जांच के स्पष्ट निर्देश भी जारी किए हैं।
⚖️ हाईकोर्ट का सख्त रुख
मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि सरकारी जमीन पर अधिकारियों की मिलीभगत से मंदिर, दुकानें, पार्क और यहां तक कि मल्टीस्टोरी अपार्टमेंट तक बना दिए गए।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के अवैध मकान तोड़े जा रहे हैं, उन्हें मुआवजा दिया जाएगा, लेकिन यह राशि सरकारी खजाने से नहीं, बल्कि दोषी अधिकारियों और बिल्डरों से वसूली जाएगी।
🔍 जांच के दायरे में कौन-कौन
ACB की जांच में वे सभी अधिकारी शामिल होंगे:
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जिन्होंने राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी कर सरकारी जमीन को निजी बताया
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जिन्होंने अवैध निर्माण के लिए किराया रसीद या ऋण मुक्ति प्रमाणपत्र जारी किए
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जिन्होंने अवैध इमारतों के भवन नक्शों को मंजूरी दी
इसके अलावा अवैध निर्माण कराने वाले बिल्डर और लाभार्थी भी जांच के दायरे में रहेंगे।
🏗️ 7 एकड़ से अधिक जमीन पर कब्जा
पूरा मामला रिम्स की 7 एकड़ से अधिक अधिग्रहित जमीन से जुड़ा है, जिसे वर्ष 1964-65 में अधिग्रहीत किया गया था। झालसा की रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि इस जमीन पर अवैध रूप से निर्माण कर फ्लैट तक बेच दिए गए।
इस रिपोर्ट के बाद अदालत ने जिला प्रशासन को 72 घंटे के भीतर अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था, जिसके बाद से रांची में अतिक्रमण हटाओ अभियान तेज कर दिया गया है।






