Ranchi: झारखंड में खसरा-रूबेला (Measles-Rubella) को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और टीकाकरण अभियान तेज कर दिया है। सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड में 10 साल की एक बच्ची में रूबेला जैसे लक्षण मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हुआ। हालांकि, बाद में प्रयोगशाला जांच में रूबेला की पुष्टि नहीं हुई। इसके बावजूद इस घटना के बाद इलाके में टीकाकरण की स्थिति की समीक्षा की गई और छूटे हुए बच्चों को वैक्सीन देने का अभियान शुरू किया गया।
बच्ची की पहचान ठेठईटांगर प्रखंड की पूर्णिमा समद के रूप में हुई है। सितंबर की शुरुआत में उसमें रूबेला से मिलते-जुलते लक्षण दिखाई दिए थे। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल निगरानी शुरू की और जांच के लिए सैंपल भेजा। जांच रिपोर्ट में रूबेला की पुष्टि नहीं होने के बाद भी विभाग ने एहतियात के तौर पर टीकाकरण अभियान को और तेज करने का फैसला लिया।
2018 में लगी थी पहली MR वैक्सीन, दूसरी डोज रह गई थी छूट
सिमडेगा के सिविल सर्जन डॉ. सुंदर मोहन समद के अनुसार, बच्ची को वर्ष 2018 में MR वैक्सीन की पहली डोज दी गई थी। इसके बाद उसका परिवार कुछ समय के लिए ओडिशा चला गया था। इस वजह से बच्ची दूसरी डोज नहीं ले सकी। अब स्वास्थ्य विभाग ने बच्ची को MR वैक्सीन की दूसरी डोज दे दी है। इसके बाद स्वास्थ्यकर्मियों ने ठेठईटांगर क्षेत्र में टीकाकरण से वंचित बच्चों की जानकारी जुटाई। सर्वे के दौरान 112 बच्चों को टीकाकरण के लिए पात्र पाया गया। इनमें से 20 सितंबर से अब तक 28 बच्चों को वैक्सीन दी जा चुकी है। अभियान में तेजी लाने के लिए बुधवार से तीन अतिरिक्त टीमें भी तैनात की जा रही हैं।
झारखंड में इस साल खसरे के 17 आउटब्रेक
सिमडेगा में सामने आए संदिग्ध मामले के बीच झारखंड में इस साल खसरे के मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की चिंता भी बढ़ी है। राज्य के टीकाकरण पदाधिकारी डॉ. विजय किशोर रजक के मुताबिक, जनवरी से अगस्त 2026 के बीच राज्य में खसरे के 17 आउटब्रेक दर्ज किए गए।
जिलावार स्थिति देखें तो पाकुड़ सबसे अधिक प्रभावित रहा है।
- पाकुड़: 9 आउटब्रेक
- पूर्वी सिंहभूम: 3 आउटब्रेक
- पश्चिमी सिंहभूम: 2 आउटब्रेक
- गुमला: 1 आउटब्रेक
- जामताड़ा: 1 आउटब्रेक
- सरायकेला-खरसावां: 1 आउटब्रेक
स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में टीकाकरण अभियान के तहत करीब 900 बच्चों का टीकाकरण किया है। इनमें 9 महीने से 5 साल तक के बच्चे शामिल हैं।
छूटे बच्चों की पहचान कर दिया जा रहा टीका
आउटब्रेक प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग उन बच्चों की भी पहचान कर रहा है, जिन्हें अभी तक MR वैक्सीन की कोई डोज नहीं मिली है। इसके अलावा ऐसे बच्चों को भी अभियान में शामिल किया जा रहा है, जिनकी दो जरूरी डोज में से कोई एक छूट गई है। कुछ मामलों में संक्रमण के खतरे को देखते हुए बच्चों को अतिरिक्त सावधानी के तौर पर दोबारा टीका भी लगाया गया है। विभाग का फोकस खास तौर पर ऐसे इलाकों पर है, जहां नियमित टीकाकरण का कवरेज अपेक्षाकृत कम रहा है।
अप्रैल-मई में बढ़े थे खसरे के मामले
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस साल अप्रैल और मई के दौरान खसरे के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई थी। इसके बाद प्रभावित जिलों में निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ टीकाकरण गतिविधियों को भी तेज किया गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की झारखंड इकाई ने खसरा-रूबेला से जुड़े संदिग्ध मामलों पर तेजी से कार्रवाई के लिए Measles-Rubella War Room भी स्थापित किया है। इसका उद्देश्य संदिग्ध मामलों की निगरानी, सूचना के त्वरित आदान-प्रदान और जरूरत पड़ने पर तत्काल स्वास्थ्य विभाग की टीमों को सक्रिय करना है।
2030 तक खसरा-रूबेला खत्म करने का लक्ष्य
झारखंड स्वास्थ्य विभाग की कोशिश राज्य में खसरा और रूबेला के संक्रमण को नियंत्रित करने के साथ टीकाकरण कवरेज को मजबूत करने की है। राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप 2030 तक खसरा और रूबेला के उन्मूलन की दिशा में राज्य में निगरानी और टीकाकरण अभियान को लगातार मजबूत किया जा रहा है। सिमडेगा का मामला भले ही जांच में रूबेला संक्रमित नहीं निकला, लेकिन इसने यह जरूर सामने ला दिया कि जिन बच्चों की नियमित टीकाकरण की डोज छूट गई है, उनकी पहचान कर उन्हें समय पर वैक्सीन देना कितना जरूरी है।



