शिव का अद्भुत धाम: भक्तों की धरना प्रथा से मनोकामना पूर्ति

Jharkhand News : झारखंड के गिरिडीह जिले का झारखंड धाम एक अनूठा शिवधाम है, जहां भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए धरना देते हैं। यह धाम गिरिडीह जिले के जमुआ अंचल में स्थित है और महाभारत काल से जुड़ी मान्यताओं का हिस्सा है। यह

शिव का अद्भुत धाम: भक्तों की धरना प्रथा से मनोकामना पूर्ति
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Jharkhand News : झारखंड के गिरिडीह जिले का झारखंड धाम एक अनूठा शिवधाम है, जहां भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए धरना देते हैं। यह धाम गिरिडीह जिले के जमुआ अंचल में स्थित है और महाभारत काल से जुड़ी मान्यताओं का हिस्सा है। यह धाम अन्य शिवधामों से काफी अलग है, क्योंकि यहां के भक्त अपने सपनों में आभास या अन्य संकेतों के बाद ही धरना छोड़ते हैं। यह परंपरा लंबे समय से जारी है, और यहां के भक्तों की भोलेनाथ के प्रति गहरी श्रद्धा साफ नजर आती है।

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झारखंड धाम की एक और विशेषता यह है कि यहां भोलेनाथ को छतविहीन खुले आसमान के नीचे निवास करना पसंद है। कई बार भक्तों ने गर्भगृह की छत बनाने की कोशिश की, लेकिन चमत्कारी घटनाओं के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो पाया। मान्यताओं के अनुसार, महाभारत युद्ध के दौरान भगवान शिव ने अर्जुन को यहीं पाशुपात्र अस्त्र प्रदान किया था। इस स्थान पर एक चमत्कारी पत्थर था, जिसपर चढ़कर बच्चे बेर तोड़ते थे। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव को बेर बहुत प्रिय हैं और यही कारण है कि यहां के लोग शिवलिंग को बेर चढ़ाते हैं।

समाजसेवी अनिल वर्मा और अनूप वर्मा ने बताया कि इस धाम में भक्त अपने मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मंदिर परिसर में हफ्तों या महीनों तक फलाहारी रहकर धरना देते हैं। जब उनकी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं, तो वे बाबा का आभार व्यक्त करते हुए घर लौट जाते हैं। भक्तों का विश्वास है कि बाबा का दरबार कभी खाली नहीं जाता, और उनका ध्यान हमेशा भक्तों की इच्छाओं को पूरा करता है।

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