Ranchi : जनजाति सुरक्षा मंच, झारखंड प्रदेश का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को राजधानी रांची में पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन से मिला और राज्य व देशहित से जुड़े सात महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा करते हुए उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। प्रमुख मुद्दों में डीलिस्टिंग बिल की माँग, जनसंख्या नियंत्रण कानून, पर्यावरण संरक्षण, सीएनटी-एसपीटी एक्ट का उल्लंघन, धार्मिक स्थलों के चंदे पर समान नियंत्रण जैसे विषय शामिल थे।

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प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दे:
- डीलिस्टिंग बिल शीघ्र पारित हो:
प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि जो जनजातीय लोग अपनी पारंपरिक संस्कृति व रीति-रिवाज छोड़कर ईसाई या इस्लाम धर्म अपना चुके हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति के आरक्षण और अन्य लाभ से वंचित किया जाए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि डीलिस्टिंग ही आदिवासी समाज की पहचान और अधिकारों की रक्षा का एकमात्र समाधान है।
- जाति प्रमाण पत्र में पति का नाम अनिवार्य हो:
झारखंड में जारी जाति प्रमाण पत्रों में केवल पिता का नाम होता है, जिससे कई महिलाएं गैर-जनजातीय पुरुषों से विवाह कर मायके से प्रमाण पत्र बनवाकर धर्मांतरण, नौकरी, जमीन और आरक्षण का अनुचित लाभ ले रही हैं। प्रतिनिधिमंडल ने माँग की कि प्रमाण पत्र में पति का नाम भी अनिवार्य किया जाए ताकि जातीय आरक्षण की वास्तविकता बनी रहे।
- देशव्यापी जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू किया जाए:
बढ़ती आबादी से देश में बेरोजगारी, गरीबी और प्रदूषण जैसी समस्याएं गंभीर हो रही हैं। मंच ने केंद्र सरकार से मांग की कि सभी नागरिकों के लिए समान जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू किया जाए, जिसमें अधिकतम दो बच्चों की सीमा तय की जाए।
- मंदिर, मस्जिद और चर्च के चंदे पर एक समान नियंत्रण हो:
प्रतिनिधियों ने सवाल उठाया कि जब हिंदू मंदिरों के चंदे पर सरकारी नियंत्रण है, तो फिर मस्जिद और चर्च इससे बाहर क्यों हैं? उन्होंने धार्मिक स्थलों पर समान कानून लागू करने की माँग की ताकि संसाधनों के उपयोग में निष्पक्षता आ सके।
- पर्यावरण के नाम पर हो रहा विनाश रोका जाए:
तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और जंगलों का विनाश जनजातीय अस्मिता और पारिस्थितिकी पर हमला है। उन्होंने ऐसे विकास की आलोचना करते हुए कहा कि जल-जंगल-जमीन की रक्षा के बिना टिकाऊ विकास संभव नहीं है।
- सीएनटी व एसपीटी एक्ट का हो रहा खुलेआम उल्लंघन:
प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि सीएनटी और एसपीटी कानूनों की अवहेलना कर जनजातीय जमीनें सादा पट्टा के नाम पर गैर-आदिवासियों को बेची जा रही हैं। यह आदिवासियों को उनके ही भूमि से बेदखल करने की साजिश है, जिस पर सरकार को सख्ती से रोक लगानी चाहिए।
- वक्फ बिल पर सरकार को धन्यवाद:
प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री व गृह मंत्री को धन्यवाद ज्ञापित किया कि 5वीं और 6वीं अनुसूचित क्षेत्रों को वक्फ अधिनियम के दायरे से बाहर रखा गया। इसे जनजातीय हितों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम बताया गया।
संकल्प और आगामी रणनीति:
प्रतिनिधियों ने यह स्पष्ट किया कि वे डॉ. बाबा कार्तिक उरांव द्वारा शुरू किए गए डीलिस्टिंग आंदोलन को जन-जागरूकता अभियान के माध्यम से पूरे राज्य में फैलाएंगे। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से एकजुट होकर इस मांग को बुलंद करने की अपील की और सरकार से शीघ्र निर्णय की अपेक्षा जताई।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख सदस्य:
सोमा उरांव (मीडिया प्रभारी, जनजाति सुरक्षा मंच एवं अध्यक्ष, झारखंड प्रदेश मुखिया संघ)
संदीप (क्षेत्रीय संयोजक)
मेघा उरांव (प्रवक्ता)
सन्नी उरांव, राजू उरांव, अजय सिंह भोक्ता, बलवंत तिर्की, विक्की लोहारा, संजय मुंडा, सूरज पहान, मधु लोहारा, विकास उरांव सहित कई अन्य सदस्य मौजूद थे।
जनजाति सुरक्षा मंच ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो वे राज्यभर में व्यापक जन आंदोलन छेड़ने के लिए बाध्य होंगे।



