- Vastu Tips के अनुसार भोजन करने का स्थान, बैठने का तरीका और दिशा महत्वपूर्ण मानी जाती है। जानें जमीन पर बैठकर खाने और डाइनिंग टेबल के वास्तु नियम।
New Delhi : आधुनिक जीवनशैली में डाइनिंग टेबल पर बैठकर भोजन करना आम बात हो गई है। सुविधा और घर के इंटीरियर के कारण लोग इसका ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, वास्तु शास्त्र में भोजन करने के स्थान, तरीके और दिशा को विशेष महत्व दिया गया है।
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, भोजन करने का तरीका, बैठने की स्थिति और दिशा स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति तथा घर की सुख-समृद्धि से जुड़ी मानी जाती है। वास्तु शास्त्र और आयुर्वेद में जमीन पर आसन लगाकर बैठकर भोजन करने को उत्तम बताया गया है।
जमीन पर बैठकर भोजन करना क्यों माना जाता है श्रेष्ठ?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, जमीन पर सुखासन या चौकड़ी मारकर भोजन करने से पृथ्वी तत्व के साथ सीधा संबंध बनता है। मान्यता है कि इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है और मन शांत रहता है।
जमीन पर बैठकर भोजन करने को अन्न के प्रति सम्मान का प्रतीक भी माना जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और अन्न-धन की कमी नहीं होती।
नंगे फर्श पर सीधे बैठकर भोजन न करें
वास्तु शास्त्र के अनुसार, भोजन करते समय सीधे नंगे फर्श पर नहीं बैठना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से शरीर की ऊर्जा जमीन में समा सकती है।
भोजन के लिए कुशा, सूती कपड़े या लकड़ी के पटरे जैसे आसन का उपयोग करना उचित माना गया है। इससे स्वच्छता बनी रहती है और वास्तु मान्यताओं के अनुसार शरीर की ऊर्जा भी सुरक्षित रहती है।
किस दिशा में मुंह करके खाना चाहिए?
वास्तु शास्त्र में भोजन के समय दिशा को भी महत्वपूर्ण माना गया है।
पूर्व दिशा: पूर्व दिशा की ओर मुंह करके भोजन करने से आयु वृद्धि, बेहतर पाचन और शरीर में ऊर्जा मिलने की मान्यता है।
उत्तर दिशा: उत्तर दिशा की ओर मुंह करके भोजन करने को धन, विद्या और ज्ञान से जोड़कर देखा जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार यह दिशा युवाओं और विद्यार्थियों के लिए उत्तम मानी जाती है।
पश्चिम दिशा: पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके भोजन करने को व्यापार और धन लाभ से जोड़ा गया है।
दक्षिण दिशा: वास्तु मान्यताओं के अनुसार दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके भोजन करने से बचना चाहिए। इसे पितरों की दिशा माना गया है और मान्यता है कि इस दिशा में भोजन करने से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
डाइनिंग टेबल पर खाना हो तो इन नियमों का रखें ध्यान
यदि शारीरिक असमर्थता या अन्य किसी मजबूरी के कारण डाइनिंग टेबल का उपयोग करना हो, तो वास्तु के अनुसार कुछ बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
वास्तु मान्यताओं के अनुसार डाइनिंग टेबल का आकार वर्गाकार या आयताकार होना शुभ माना जाता है। गोल या ओवल आकार की टेबल को शुभ नहीं माना जाता।
डाइनिंग टेबल को घर की पश्चिम या दक्षिण-पूर्व दिशा, यानी आग्नेय कोण में रखना उपयुक्त माना गया है। भोजन करते समय भी संभव हो तो चेहरा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखने की सलाह दी जाती है।
जमीन या डाइनिंग टेबल, क्या है बेहतर विकल्प?
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, आसन बिछाकर जमीन पर बैठकर भोजन करना सबसे उत्तम माना गया है। हालांकि, आधुनिक जीवनशैली और शारीरिक जरूरतों के कारण डाइनिंग टेबल का उपयोग करने वालों को भी सही दिशा और व्यवस्था का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।



