224 साल पुराना काशी विश्वनाथ मंदिर: नेपाली शैली की अनूठी बनावट, गर्मी में भी रहता है शीतल

Patna : पटना सिटी चौक से लगभग 100 गज की दूरी पर, जनता होटल के सामने कठौतिया गली मोड़ के पास स्थित 224 वर्ष प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। नेपाली शैली में निर्मित इस प्राचीन

224 साल पुराना काशी विश्वनाथ मंदिर: नेपाली शैली की अनूठी बनावट, गर्मी में भी रहता है शीतल

Patna : पटना सिटी चौक से लगभग 100 गज की दूरी पर, जनता होटल के सामने कठौतिया गली मोड़ के पास स्थित 224 वर्ष प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। नेपाली शैली में निर्मित इस प्राचीन शिव मंदिर की वास्तुकला और अनूठी बनावट इसे विशेष पहचान दिलाती है।

1801 में हुई थी शिवलिंग की स्थापना

मंदिर के पुजारी पंडित नर्मदेश्वर मिश्र उर्फ बासठ बाबा के अनुसार, संवत 1858 (वर्ष 1801) में सचिवालय में कार्यरत चपरासी काशीनाथ ने यहां चबूतरे पर शिवलिंग की स्थापना की थी। बाद में फग्गू जी विश्वकर्मा ने चबूतरे का जीर्णोद्धार कराया। समय के साथ यह मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बन गया और दूर-दराज से लोग यहां पूजा-अर्चना के लिए आने लगे।

1985 में हुआ मंदिर का जीर्णोद्धार

वर्ष 1985 में व्यवसायी मन्ना लाल बिहारी लाल और काशी प्रसाद हरलालका ने मंदिर का व्यापक जीर्णोद्धार कराया। मंदिर को नेपाली शैली में विकसित किया गया और इसमें मकराना का संगमरमर लगाया गया।

लकड़ी और टीन की छत रखती है मंदिर को ठंडा

मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता इसकी छत है। ऊपर टीन और नीचे लकड़ी की छत होने के कारण भीषण गर्मी में भी मंदिर का वातावरण ठंडा और आरामदायक बना रहता है। यही वजह है कि श्रद्धालु लंबे समय तक मंदिर परिसर में बैठकर पूजा और ध्यान कर पाते हैं।

सावन में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

सावन के पवित्र महीने में मंदिर में आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ दूर-दराज से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर पूरे महीने भक्तिमय माहौल से सराबोर रहता है।

भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों का केंद्र

स्थानीय लोगों के सहयोग और कार सेवा से मंदिर परिसर में एक विशाल हॉल का निर्माण कराया गया है, जहां नियमित रूप से भजन-कीर्तन, रामायण पाठ, अष्टजाम और संत-महात्माओं के प्रवचन आयोजित होते हैं।

मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम पूजा-अर्चना होती है तथा शाम की आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। महिलाएं भी नियमित रूप से यहां भजन-कीर्तन में भाग लेकर धार्मिक वातावरण को जीवंत बनाए रखती हैं।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram
संबंधित खबरें.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अभी-अभी.