Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची में आगामी झारखंड प्रार्थना महोत्सव (चंगाई सभा) 2025 को लेकर आदिवासी संगठनों का आक्रोश फूट पड़ा है। सोमवार, 28 अप्रैल को कई प्रमुख जनजातीय संगठनों ने संयुक्त रूप से राज्यपाल, उपायुक्त एवं अनुमंडल पदाधिकारी रांची को ज्ञापन सौंपते हुए इस आयोजन पर अविलंब प्रतिबंध लगाने की मांग की।
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ज्ञापन सौंपने वाले संगठनों में जनजाति सुरक्षा मंच झारखंड, झारखंड आदिवासी सरना विकास समिति, मिसिर गोंदा सरना विकास समिति और राष्ट्रीय आदिवासी मंच शामिल रहे। इन संगठनों ने आरोप लगाया कि 1 मई से 3 मई तक प्रभात तारा मैदान में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम आदिवासी समाज की आस्था और सांस्कृतिक पहचान के खिलाफ है, और इससे सामाजिक वैमनस्य पैदा होने की गंभीर आशंका है।
आदिवासी संगठनों ने कहा कि इस आयोजन के जरिये धर्म स्वतंत्र विधेयक 2017 और संविधान के अनुच्छेद 244 एवं अनुच्छेद 25 का स्पष्ट उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने पूर्व वर्षों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि “चंगाई सभा” जैसे आयोजनों की आड़ में भोले-भाले आदिवासियों का बड़े पैमाने पर धर्मांतरण किया गया है। इस संबंध में झारखंड उच्च न्यायालय में वाद संख्या 4213/2018 के तहत एक जनहित याचिका भी विचाराधीन है।
आवेदन में कहा गया है कि इस तरह के कार्यक्रम आदिवासी अस्मिता, संस्कृति और अस्तित्व पर सीधा प्रहार हैं, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि कार्यक्रम को रोका नहीं गया तो जनजातीय समाज में भारी आक्रोश फैल सकता है और मजबूरन आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ेगा।
ज्ञापन सौंपने वालों में संदीप उरांव, मेघा उरांव, सोमा उरांव, प्रदीप लकड़ा, सन्नी टोप्पो, जगरनाथ भगत, जयमंत्री उरांव, लोरेया उरांव, बाढ़ुम देव उरांव, सुशीला उरांव, रीना उरांव, अंगतुक तिर्की, प्रेम टोप्पो, मनोज भगत, विशु उरांव, सतीश तिग्गा, राजू उरांव व विक्रम उरांव समेत कई पदाधिकारी प्रमुख रूप से शामिल रहे।
आदिवासी नेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि धर्मांतरण के किसी भी प्रयास के खिलाफ वे एकजुट होकर संघर्ष करेंगे और अपनी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएंगे।

