Ranchi : ग्रामीण विकास विभाग (RWD) के एक टेंडर को लेकर एक बार फिर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। हजारीबाग ग्रामीण कार्य विभाग की एक ई-निविदा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठने के बाद महालेखाकार (AG), झारखंड ने मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है।
यह कार्रवाई आरटीआई एवं सामाजिक कार्यकर्ता शनिकांत की शिकायत पर की गई है। शिकायत के साथ टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज भी महालेखाकार कार्यालय को सौंपे गए हैं।
क्या है मामला
शिकायत के अनुसार, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव और प्रधान महालेखाकार (ऑडिट) को उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में बताया गया है कि ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, हजारीबाग के कार्यपालक अभियंता कार्यालय द्वारा ई-निविदा संख्या 05/2025-26/RWD/EE/HAZARIBAG जारी की गई थी।
यह निविदा केरेडारी प्रखंड के लवनिया मोड़ से जोरदाग रोड तक 2 किलोमीटर सड़क एवं गार्डवाल निर्माण के लिए आमंत्रित की गई थी। परियोजना की अनुमानित लागत 4 करोड़ 99 लाख 77 हजार 900 रुपये निर्धारित की गई थी।
लागत निर्धारण पर उठे सवाल
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि परियोजना की लागत जानबूझकर 5 करोड़ रुपये से मात्र 22,100 रुपये कम रखी गई, ताकि उच्च स्तर की तकनीकी जांच और प्रशासनिक स्वीकृति की प्रक्रिया से बचा जा सके।
सिर्फ सात दिन का समय देने पर आपत्ति
आरोप है कि निविदा 20 फरवरी को प्रकाशित की गई और आवेदन की अंतिम तिथि 27 फरवरी निर्धारित की गई। इस तरह संवेदकों को आवेदन के लिए केवल सात दिन का समय मिला।
शिकायतकर्ता का कहना है कि इस अवधि में रविवार और नगर निकाय चुनाव भी थे, जिससे प्रभावी कार्य दिवस घटकर केवल चार से पांच दिन रह गए। इसे निविदा प्रक्रिया के निर्धारित नियमों और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के सिद्धांतों के विपरीत बताया गया है।
विशेष ठेकेदार को लाभ पहुंचाने का आरोप
शिकायत में दावा किया गया है कि समय-सीमा जानबूझकर कम रखी गई ताकि अन्य पात्र संवेदक निविदा प्रक्रिया में भाग न ले सकें और एक विशेष ठेकेदार को लाभ मिल सके। शिकायतकर्ता ने इसे पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रणाली का उल्लंघन बताया है।
रेलवे साइडिंग से जुड़े पहलुओं की भी होगी जांच
बताया गया है कि प्रस्तावित सड़क कोयला परियोजनाओं की रेलवे साइडिंग तक पहुंचने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि सड़क निर्माण के लिए आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी अनुमतियां ली गई थीं या नहीं।
ED की कार्रवाई के बाद फिर उठे सवाल
ग्रामीण विकास विभाग इससे पहले भी कथित टेंडर घोटालों को लेकर चर्चा में रहा है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। ऐसे में विभाग में एक बार फिर अनियमितताओं के आरोप सामने आने से कई सवाल खड़े हो गए हैं।
AG की विशेष जांच शुरू
विभागीय स्तर पर जांच में कथित ढिलाई के बाद अब महालेखाकार कार्यालय ने सीधे जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, विशेष ऑडिट के दौरान निविदा की तकनीकी प्रक्रिया, लागत निर्धारण, कार्यपालक अभियंता के कार्यकाल में जारी अन्य टेंडरों तथा नियमों के अनुपालन सहित विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जांच की जाएगी।
शिकायतकर्ता ने मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की भी मांग की है।



