Ranchi : हरमू रोड स्थित मारवाड़ी भवन में वनवासी कल्याण आश्रम के ग्राम विकास प्रकल्प के अंतर्गत दो दिवसीय अखिल भारतीय अध्ययन वर्ग की शुरुआत हुई। यह कार्यक्रम देश के विभिन्न राज्यों—असम, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड—से आए 55 स्वयं सहायता समूह (SHG) कार्यकर्ताओं की भागीदारी से संपन्न हो रहा है।
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इस विशेष प्रशिक्षण वर्ग का उद्देश्य जनजातीय और वनवासी क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाना है। प्रशिक्षण सत्रों में मोबाइल ऐप के सही उपयोग, स्वयं सहायता समूहों के विस्तार, कार्यकर्ता विकास, पर्यावरण संरक्षण और जनजातीय महिलाओं के आर्थिक उन्नयन जैसे विषयों को शामिल किया गया है।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में श्री बिंदेश्वर साहू ने कहा कि “स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण और वनवासी महिलाएं आज आत्मनिर्भर बन रही हैं और हर स्तर पर निर्णय लेने में सक्षम हो रही हैं। यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी परिवर्तन है।”
वहीं, श्रीमती अर्पणा जी ने भारतीय परंपरा में महिला समूहों की ऐतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डाला और बताया कि किस तरह से प्राचीन काल से ही महिलाएं सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक निर्णयों में भागीदार रही हैं।
यह अध्ययन वर्ग न केवल वनवासी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करेगा, बल्कि उनमें नेतृत्व, आत्मबल और पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी उत्पन्न करेगा। आयोजकों का कहना है कि इस प्रशिक्षण शिविर से प्राप्त ज्ञान और कौशल को कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों में ले जाकर अन्य महिलाओं तक पहुंचाएंगे।
यह वर्ग वनवासी समाज में जागरूकता फैलाने और महिलाओं की भूमिका को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

