दो चरणों में होगा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव
Kolkata : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही सियासी माहौल गर्म हो गया है। इस बार चुनाव केवल दो चरणों में होंगे, जिससे राज्य की राजनीतिक तस्वीर को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चरणबद्ध मतदान रणनीति के लिहाज से बेहद अहम साबित होगी।
पहले चरण में कड़ा मुकाबला
23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान होगा। पिछले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 के आंकड़ों के आधार पर देखें तो:
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तृणमूल कांग्रेस को करीब 92 सीटों पर बढ़त
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भारतीय जनता पार्टी को 59 सीटें
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1 सीट अन्य के खाते में
इस चरण में मुकाबला काफी करीबी माना जा रहा है। उत्तर, पश्चिम और मध्य क्षेत्रों में दोनों दलों की मजबूत मौजूदगी देखने को मिलती है।
दूसरे चरण में टीएमसी का दबदबा
29 अप्रैल को दूसरे चरण में 142 सीटों पर मतदान होगा। यहां तस्वीर पूरी तरह अलग नजर आती है:
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तृणमूल कांग्रेस: करीब 123 सीटें (86% से अधिक)
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बीजेपी: 18 सीटें
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अन्य: 1 सीट
यह क्षेत्र लंबे समय से टीएमसी का मजबूत गढ़ रहा है।
ममता बनर्जी का मजबूत आधार
ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने इस क्षेत्र में लगातार मजबूत पकड़ बनाई है। महिलाओं, अल्पसंख्यकों और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों का समर्थन पार्टी को मजबूती देता रहा है।
बीजेपी के सामने बड़ी चुनौती
विश्लेषकों के मुताबिक बीजेपी के लिए दूसरे चरण में सबसे बड़ी चुनौती टीएमसी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाना होगी। खासकर ग्रामीण और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े मतदाताओं तक पहुंच बनाना आसान नहीं होगा।
दो हिस्सों में बंटा चुनावी मैदान
दो चरणों में होने वाला यह चुनाव राज्य को लगभग दो अलग-अलग चुनावी क्षेत्रों में बांटता नजर आ रहा है—
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पहला चरण: कड़ी टक्कर
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दूसरा चरण: टीएमसी का मजबूत प्रभाव
ऐसे में दोनों प्रमुख दल अपनी रणनीति भी चरणों के हिसाब से अलग-अलग तैयार कर रहे हैं।

