New Delhi : अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों को उम्मीद है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से तेल आपूर्ति सामान्य हो सकेगी।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 3.5 प्रतिशत से अधिक गिरकर 83.48 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी कच्चा तेल WTI (वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट) लगभग 5 प्रतिशत टूटकर 80.61 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
ट्रंप के बयान का असर
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान के साथ संभावित शांति समझौते और Strait of Hormuz को जल्द खोलने की घोषणा के बाद तेल बाजार में यह गिरावट देखने को मिली।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समझौता सफल होता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर बना दबाव काफी हद तक कम हो सकता है।
युद्ध के दौरान 120 डॉलर तक पहुंचा था तेल
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने और संघर्ष शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया था। एक समय ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी।
इसके विपरीत, संघर्ष शुरू होने से पहले कच्चा तेल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
होर्मुज जलडमरूमध्य का वैश्विक महत्व
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के कारण इस मार्ग पर अनिश्चितता बनी हुई थी, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो रहे थे।
दुनिया को मिल सकती है राहत
यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुल जाता है और तेल परिवहन सामान्य हो जाता है, तो इससे वैश्विक बाजारों को राहत मिल सकती है। इसके साथ ही कई देशों में ईंधन की कीमतों और महंगाई पर भी सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है।
हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि तेल कीमतों की आगे की दिशा अमेरिका-ईरान समझौते के औपचारिक क्रियान्वयन और क्षेत्रीय हालात पर निर्भर करेगी।


