Bihar: बुलेट ट्रेन को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। दिल्ली से वाराणसी, पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक प्रस्तावित हाई स्पीड रेल कॉरिडोर में बिहार के कई प्रमुख शहरों को जोड़ने की योजना है। इस कॉरिडोर पर ट्रेन की अधिकतम परिचालन गति 320 किलोमीटर प्रति घंटे रखने की योजना है। परियोजना पूरी होने के बाद पटना से दिल्ली के बीच यात्रा का समय करीब 4 घंटे 41 मिनट तक हो सकता है। केंद्रीय बजट 2026-27 में दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की गई थी। प्रस्तावित कॉरिडोर की लंबाई करीब 1550 से 1560 किलोमीटर के बीच बताई जा रही है। परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट यानी DPR तैयार करने की दिशा में नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) की ओर से टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। हालांकि, अभी काम का आवंटन होना बाकी है।
बिहार के किन शहरों से गुजरेगा हाई स्पीड रेल कॉरिडोर?
प्रस्तावित रूट दिल्ली से शुरू होकर लखनऊ और वाराणसी के रास्ते बिहार में प्रवेश करेगा। इसके बाद यह कॉरिडोर पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी की ओर जाएगा।
बिहार में प्रस्तावित रूट में इन शहरों के नाम सामने आए हैं:
- बक्सर
- आरा
- पटना
- बेगूसराय
- खगड़िया
- कटिहार
- पूर्णिया
- किशनगंज
अब तक उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बिहार में बक्सर, पटना, बेगूसराय, खगड़िया और कटिहार में पांच स्टेशन बनाए जाने की संभावना बताई जा रही है। हालांकि, स्टेशन और रूट की अंतिम स्थिति DPR, सर्वे और आगे की तकनीकी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
350 KM की डिजाइन स्पीड, 320 KM की परिचालन गति
दिल्ली-सिलीगुड़ी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर को देश की मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। प्रस्तावित ट्रैक की डिजाइन स्पीड करीब 350 किलोमीटर प्रति घंटे होगी, जबकि ट्रेन को लगभग 320 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलाने की योजना है। इस हाई स्पीड रेल परियोजना में सामान्य रेलवे ट्रैक से अलग स्लैब ट्रैक तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें पारंपरिक ट्रैक की तरह गिट्टी का इस्तेमाल नहीं होता, बल्कि मजबूत कंक्रीट स्लैब पर ट्रैक तैयार किया जाता है। हाई स्पीड ट्रेन के संचालन के दौरान ट्रैक की स्थिरता बनाए रखने में यह तकनीक महत्वपूर्ण होती है। सटीक तरीके से तैयार किए गए ट्रैक से ट्रेन के संचालन के दौरान कंपन और शोर को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।
पटना में कहां बनेगा बुलेट ट्रेन स्टेशन?
पटना में हाई स्पीड रेल स्टेशन की संभावित जगह को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। फुलवारीशरीफ स्थित एम्स के आसपास का इलाका और बिहटा संभावित स्थानों के तौर पर चर्चा में हैं। हालांकि, इसे अभी अंतिम स्टेशन स्थल नहीं माना जा सकता। पहले सर्वे और DPR तैयार होगी। इसके बाद रूट, स्टेशन की लोकेशन और प्रभावित जमीन से जुड़ी जानकारी को अंतिम रूप दिया जाएगा। बिहार में अभी इस परियोजना के लिए आधिकारिक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।
करीब 750 यात्रियों की क्षमता वाली ट्रेन
प्रस्तावित दिल्ली-पटना-सिलीगुड़ी हाई स्पीड रेल रूट पर करीब 750 सीटों वाली ट्रेन चलाने की जानकारी सामने आई है। तुलना करें तो मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना में करीब 731 यात्रियों की क्षमता वाली ट्रेन का प्रावधान है। इस तरह प्रस्तावित ट्रेन बड़े पैमाने पर यात्रियों को तेज और समयबद्ध रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध करा सकती है।
बिहार को क्या होगा फायदा?
हाई स्पीड रेल नेटवर्क तैयार होने के बाद बिहार के प्रमुख शहरों की देश के बड़े आर्थिक और औद्योगिक केंद्रों से कनेक्टिविटी बेहतर हो सकती है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बीच तेज रेल संपर्क का सीधा असर बिहार के कारोबार और परिवहन क्षेत्र पर भी पड़ सकता है।
संभावित फायदे इस प्रकार हैं:
- दिल्ली और सिलीगुड़ी की तेज कनेक्टिविटी
- बिहार के प्रमुख शहरों के बीच बेहतर संपर्क
- व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा
- लॉजिस्टिक और वेयरहाउसिंग क्षेत्र के विस्तार की संभावना
- पर्यटन को बढ़ावा
- आईटी और सर्विस सेक्टर के लिए नए अवसर
- फूड प्रोसेसिंग और टेक्सटाइल सेक्टर को बेहतर बाजार कनेक्टिविटी
पटना, बक्सर, आरा, बेगूसराय और कटिहार जैसे शहरों को इस नेटवर्क से कनेक्टिविटी का लाभ मिलने की संभावना है।
जमीन अधिग्रहण और बाढ़ क्षेत्र बड़ी चुनौती
हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण में बिहार के सामने कई व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं। इनमें सबसे अहम चुनौती भूमि अधिग्रहण की हो सकती है। राज्य के कई हिस्सों में आबादी घनी है और कृषि भूमि का बड़ा क्षेत्र भी मौजूद है। इसके अलावा बिहार की भौगोलिक स्थिति भी निर्माण कार्य को प्रभावित कर सकती है। कई इलाकों में नदियां और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र हैं। ऐसे क्षेत्रों में पुल, वायाडक्ट और अन्य संरचनाओं के निर्माण के लिए विशेष इंजीनियरिंग समाधान की आवश्यकता पड़ सकती है। घनी आबादी वाले इलाकों में ट्रैक के लिए जमीन उपलब्ध कराना भी परियोजना की गति को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण मुद्दा होगा।
जापानी शिंकानसेन मॉडल से जुड़ी तकनीक
भारत की मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना जापान की शिंकानसेन तकनीक और मॉडल पर आधारित है। प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर में भी हाई स्पीड रेल के लिए निर्धारित आधुनिक तकनीकी मानकों को अपनाने की योजना है। फिलहाल परियोजना शुरुआती चरण में है। DPR, सर्वे, रूट का अंतिम निर्धारण, स्टेशन की जगह और भूमि अधिग्रहण जैसी प्रक्रियाओं के बाद ही बिहार में हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। इसलिए अभी जिन शहरों और स्टेशनों के नाम सामने आ रहे हैं, उन्हें संभावित रूट के रूप में देखा जाना चाहिए। अंतिम रूट और स्टेशन की जानकारी परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट और संबंधित मंजूरियों के बाद ही स्पष्ट होगी।


