Ranchi : झारखंड में आदिवासी जमीन प्रबंधन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने इस मामले में राज्य सरकार की कानूनी राय को खारिज कर दिया है और ऑडिट को अपना संवैधानिक अधिकार बताया है।
जानकारी के अनुसार, जब राज्य सरकार ने आदिवासी जमीन प्रबंधन से जुड़े दस्तावेज देने से इनकार किया, तो महालेखाकार ने इसकी जानकारी CAG को दी। इसके बाद CAG के प्रोफेशनल प्रैक्टिस ग्रुप (PPG) ने पूरे मामले की समीक्षा की।
PPG ने स्पष्ट कहा कि संविधान के अनुच्छेद 149 और 151 के साथ-साथ CAG एक्ट 1971 के तहत ऑडिट संस्था को सभी संबंधित दस्तावेजों की जांच करने का पूरा अधिकार है। यह अधिकार उन सभी सरकारी विभागों पर लागू होता है जो सार्वजनिक संसाधनों और धन से जुड़े कार्य करते हैं।
PPG ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑडिट प्रक्रिया किसी न्यायिक फैसले में हस्तक्षेप नहीं करती, बल्कि यह सुनिश्चित करती है कि सरकारी कार्य कानून और नियमों के तहत हो रहे हैं या नहीं।
इसके बाद झारखंड के महालेखाकार ने राज्य सरकार को दोबारा पत्र लिखकर आदिवासी जमीन प्रबंधन से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की है।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने पहले यह तर्क दिया था कि आदिवासी जमीन हस्तांतरण से जुड़े मामले अर्द्ध-न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत आते हैं, जिनकी समीक्षा का अधिकार राजस्व परिषद को है, न कि ऑडिट संस्था को।
अब इस पूरे मामले में CAG के हस्तक्षेप के बाद झारखंड में प्रशासनिक और कानूनी बहस तेज हो गई है।

