- नंदीग्राम उपचुनाव से पहले लिफाफा चुनाव चिह्न के आवंटन पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने EC से सवाल किए और निष्पक्ष तरीके से काम करने की टिप्पणी की।
Kolkata : पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव से पहले चुनाव चिह्न को लेकर विवाद कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंच गया है। भारतीय सेक्युलर फ्रंट (ISF) की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति कृष्ण राव की एकल पीठ ने चुनाव आयोग से ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न के आवंटन को लेकर कड़े सवाल किए।
अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि चुनाव आयोग को निष्पक्ष और उचित तरीके से काम करना चाहिए। न्यायमूर्ति राव ने यह भी सवाल किया कि जब आयोग के पास 183 मुक्त चुनाव चिह्न उपलब्ध हैं, तो उसी ‘लिफाफा’ चिह्न का चयन क्यों किया गया, जिसका इस्तेमाल ISF करती रही है।
क्या है लिफाफा चुनाव चिह्न का विवाद?
मामला 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम उपचुनाव से जुड़ा है। ISF ने इस सीट से अपना उम्मीदवार उतारा है और पार्टी पहले ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करती रही है।
चुनाव आयोग ने हाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे विवाद के बाद दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘Mamata All India Trinamool Congress’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चिह्न दिया गया है, जबकि ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘Democratic Trinamool Congress’ नाम और ‘लिफाफा’ चिह्न आवंटित किया गया। ISF को उपचुनाव के लिए ‘अलमारी’ चिह्न दिया गया है।
ISF ने आयोग के इस फैसले को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। पार्टी की ओर से दलील दी गई कि वह पहले से इस चिह्न का इस्तेमाल करती रही है और उसी उपचुनाव में उम्मीदवार भी उतार रही है।
हाईकोर्ट ने आयोग से क्या पूछा?
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने आयोग के वकील से पूछा कि जब 183 मुक्त चुनाव चिह्न उपलब्ध हैं, तो ऐसी स्थिति में ‘लिफाफा’ चिह्न ही दूसरी पार्टी को क्यों दिया गया।
अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि इस तरह के मामले में संबंधित चिह्न को सुरक्षित रखा जाना चाहिए था। न्यायमूर्ति राव ने आयोग से कहा कि “प्राधिकरण को निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए।”
अदालत ने चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद इस तरह के विवाद के कारण राजनीतिक दलों के अदालत पहुंचने पर भी नाराजगी जताई। रिपोर्टों के अनुसार, न्यायमूर्ति राव ने कहा कि चुनाव शुरू होते ही इस तरह की स्थिति पैदा हो रही है और इससे अदालत पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
आयोग ने क्या दलील दी?
चुनाव आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि चुनाव लड़ने वाले दलों को उपलब्ध चुनाव चिह्नों में से विकल्प चुनने का अवसर दिया जाता है। इसके बाद अंतिम आवंटन आयोग की प्रक्रिया के तहत किया जाता है।
ISF की ओर से इस दलील का विरोध किया गया। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि अंतिम चुनाव चिह्न आवंटित करने का अधिकार आयोग के पास है।
आयोग के वकील ने अधिसूचना जारी नहीं होने के कारण की जानकारी लेने के लिए समय मांगा। इसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई शुक्रवार तक स्थगित कर दी और आयोग से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी।
नंदीग्राम उपचुनाव पर नजर
नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव 6 अक्टूबर 2026 को होना है। चुनाव आयोग के चुनाव चिह्न संबंधी फैसले और ISF की याचिका के बाद यह मामला अब अदालत के समक्ष विचाराधीन है।
फिलहाल हाईकोर्ट ने चुनाव चिह्न के आवंटन को लेकर आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है। मामले में आगे की स्थिति शुक्रवार की सुनवाई के बाद स्पष्ट होगी।




