मुख्यमंत्री उद्यमी योजना से बदली जिंदगी, अजय और इम्तियाज ने खड़ा किया करोड़ों का कारोबार

मुख्यमंत्री उद्यमी योजना से बिहार के अजय और इम्तियाज ने स्वरोजगार शुरू किया। फर्नीचर और रेडीमेड गारमेंट कारोबार से रोजगार के अवसर भी बढ़े।
अली इंटरप्राइजेज
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Patna News: बिहार में रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं के लिए मुख्यमंत्री उद्यमी योजना स्वरोजगार की राह खोल रही है। पूर्वी चंपारण के इम्तियाज अली और मधेपुरा के अजय कुमार पासवान की कहानी इसका उदाहरण है। दोनों ने आर्थिक चुनौतियों के बावजूद योजना की मदद से अपना कारोबार शुरू किया और आज न सिर्फ आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि दूसरे लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं। सरकार की इस योजना का उद्देश्य युवाओं और महिलाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता और जरूरी प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है। योजना का लाभ लेकर कई लोग छोटे स्तर से कारोबार शुरू कर उसे धीरे-धीरे आगे बढ़ा रहे हैं।

साइबर कैफे में नौकरी से रेडीमेड गारमेंट फैक्ट्री तक पहुंचे इम्तियाज

पूर्वी चंपारण के इम्तियाज अली का सपना बचपन से ही अपना रेडीमेड गारमेंट कारखाना शुरू करने का था। हालांकि, परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति उनके सामने बड़ी चुनौती थी। परिवार चलाने के लिए उन्होंने साइबर कैफे सहित अलग-अलग जगहों पर छोटी-मोटी नौकरियां कीं। इसी दौरान उन्हें सोशल मीडिया और समाचार पत्रों के माध्यम से मुख्यमंत्री उद्यमी योजना की जानकारी मिली। उन्होंने योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन किया। आवेदन के बाद उन्हें व्यवसाय से संबंधित प्रशिक्षण का अवसर मिला। इसके बाद उन्होंने अपने सपने को कारोबार में बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया। इम्तियाज ने अली इंटरप्राइजेज के नाम से रेडीमेड गारमेंट फैक्ट्री शुरू की। इसके जरिए उन्होंने खुद के लिए रोजगार का रास्ता बनाया और दूसरे लोगों को भी काम देने में सफल रहे।

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₹7.50 लाख की मदद से शुरू किया कारोबार

इम्तियाज अली को मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत तीन किस्तों में कुल 7.50 लाख रुपये का ऋण मिला। इस राशि का इस्तेमाल उन्होंने फैक्ट्री के लिए शेड, मशीन, जरूरी उपकरण और कच्चा माल खरीदने में किया। आज उनकी रेडीमेड गारमेंट इकाई में करीब 5 लोग काम कर रहे हैं। उनके तैयार कपड़ों की मांग बिहार के अलावा दूसरे राज्यों से भी आने का दावा किया गया है। इम्तियाज के मुताबिक, आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण जिन युवाओं के लिए अपना व्यवसाय शुरू करना मुश्किल था, उनके लिए इस तरह की सहायता कारोबार खड़ा करने में मददगार साबित हो सकती है।

मधेपुरा के अजय ने गांव से शुरू किया फर्नीचर का कारोबार

मुख्यमंत्री उद्यमी योजना से सफलता की दूसरी कहानी मधेपुरा जिले के सिंहेश्वर प्रखंड के बसहा टोला, कमरगामा निवासी अजय कुमार पासवान की है। रोजगार की तलाश से अपना कारोबार शुरू करने तक का उनका सफर ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार की संभावनाएं दिखाता है। अजय कुमार ने प्रतीक इंटरप्राइजेज की स्थापना कर फर्नीचर निर्माण का काम शुरू किया। उनकी इकाई में ग्राहकों की जरूरत के मुताबिक कई तरह के फर्नीचर और घरेलू उपयोग के सामान तैयार किए जाते हैं।

₹10 लाख की परियोजना से शुरू हुई इकाई

अजय कुमार ने करीब 10 लाख रुपये की परियोजना राशि से अपने उद्यम की शुरुआत की। यहां फर्नीचर के अलावा गोदरेज, ट्रंक, बक्सा, कोठी, ड्रेसिंग, सोफा, पलंग और मेट्रेस समेत कई उत्पाद तैयार किए जाते हैं। अजय के अनुसार, अनुभवी कारीगरों की मदद से अलग-अलग डिजाइन और जरूरत के मुताबिक फर्नीचर तैयार किया जाता है। कारोबार बढ़ने के साथ उनकी इकाई में काम का दायरा भी बढ़ा है।

7 से 8 लोगों को मिल रहा रोजगार

अजय कुमार का कहना है कि उनका कारोबार केवल परिवार की आजीविका तक सीमित नहीं रहा। व्यवसाय बढ़ने के साथ उन्होंने करीब 7 से 8 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराया है। उनके मुताबिक, स्वरोजगार ने उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया और कारोबार के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ीं।

फर्नीचर कारोबार से 1 करोड़ रुपये तक का सालाना टर्नओवर

अजय कुमार के अनुसार, वर्तमान में उनके फर्नीचर कारोबार से करीब 1 करोड़ रुपये तक का वार्षिक कारोबार हो रहा है। अब वह अपने व्यवसाय को और बड़े स्तर पर ले जाने की तैयारी में हैं। उनकी योजना गांव में चल रहे कारोबार का विस्तार कर इसे NH-106 के समीप बड़े स्तर पर स्थापित करने की है। इससे कारोबार का दायरा बढ़ाने के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है।

युवाओं के लिए स्वरोजगार का बढ़ता रास्ता

इम्तियाज अली और अजय कुमार की कहानियां यह दिखाती हैं कि आर्थिक संसाधनों की कमी के बावजूद प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता मिलने पर छोटे स्तर से कारोबार शुरू किया जा सकता है। एक ओर जहां दोनों ने अपने लिए रोजगार तैयार किया, वहीं उनकी इकाइयों से दूसरे लोगों को भी काम मिला। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के जरिए ऐसे उदाहरण बिहार में स्वरोजगार और छोटे उद्यमों को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार के प्रयासों को सामने रखते हैं। हालांकि, किसी भी व्यवसाय की सफलता बाजार की मांग, प्रबंधन, निवेश और लगातार मेहनत जैसे कई कारकों पर भी निर्भर करती है।

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